सबरीमाला मंदिर सोना हेराफेरी मामला: केरल हाईकोर्ट ने SIT को दी दो हफ्ते की मोहलत, जमशेदपुर से आएगी मुख्य वैज्ञानिक रिपोर्ट

 केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला मंदिर के ऐतिहासिक आभूषणों और कलाकृतियों से सोने की कथित हेराफेरी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को दो सप्ताह का और समय दे दिया है। अदालत ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि इस पूरे मामले का खुलासा करने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण वैज्ञानिक रिपोर्ट अभी तक जांच एजेंसी को नहीं मिल पाई है।

यह बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट जमशेदपुर स्थित राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (National Metallurgical Laboratory – NML) से आनी है, जो यह तय करेगी कि क्या मंदिर के सोने की परतों वाली प्लेटों में कोई मिलावट या अदला-बदली की गई थी।

फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी है पूरी जांच

जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की खंडपीठ ने जांच टीम (SIT) की दलील सुनने के बाद इस समय-सीमा को बढ़ाने की मंजूरी दी। एसआईटी ने कोर्ट को बताया कि मंदिर की कलाकृतियों से लिए गए लगभग 36 सोने के नमूनों की जांच जमशेदपुर की प्रयोगशाला में चल रही है।

जांच टीम के अनुसार, धातुकर्म (metallurgical) से जुड़े ये परीक्षण बेहद जटिल और समय लेने वाले होते हैं, जिस वजह से इस रिपोर्ट में देरी हुई है। हालांकि, प्रयोगशाला ने संकेत दिया है कि अगले 10 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।

इस वैज्ञानिक रिपोर्ट के बिना जांच टीम कानूनी रूप से आगे नहीं बढ़ सकती। हाईकोर्ट की पीठ ने भी इस तकनीकी निर्भरता को रेखांकित करते हुए कहा:

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“इस रिपोर्ट के मिलने के बाद ही जांच एजेंसी इस निष्कर्ष पर पहुंच पाएगी कि सोने की परत चढ़ी प्लेटों पर सोने की वास्तविक मात्रा कितनी थी, इसमें कितने सोने की हेराफेरी हुई और क्या तांबे की प्लेटों की कोई अदला-बदली की गई थी।”

दोषियों की पहचान और नए मामलों पर लगी रोक

यह पूरा मामला पहाड़ी पर स्थित प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर के गर्भगृह (श्रीकोविल) के दरवाजों के फ्रेम और द्वारपालक की मूर्तियों पर चढ़े सोने के साथ कथित छेड़छाड़ और चोरी से जुड़ा है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक एनएमएल (NML) के निष्पक्ष और वैज्ञानिक आंकड़े सामने नहीं आते, तब तक यह तय करना नामुमकिन है कि सोने की परत वाली तांबे की प्लेटों को हटाने या बदलने में किन-किन लोगों की संलिप्तता थी। इसके अलावा, जब तक प्रयोगशाला की रिपोर्ट में सोने की चोरी की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक संदिग्धों के खिलाफ नए आपराधिक मामले दर्ज करने की प्रक्रिया भी रुकी रहेगी।

खंडपीठ ने इस फैसले को सही ठहराते हुए कहा, “हम इस बात से संतुष्ट हैं कि इस मामले के तथ्यों को पूरी तरह समझने और दोषियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला की रिपोर्ट अत्यंत आवश्यक है।”

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जांच की पृष्ठभूमि

सबरीमाला मंदिर के गर्भगृह और मूर्तियों के आभूषणों में कथित अनियमितताओं और सोने की चोरी के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए केरल उच्च न्यायालय ने इस विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था।

यह दूसरा मौका है जब हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी को अतिरिक्त समय दिया है। इससे पहले, 26 मार्च को दिए अपने आदेश में अदालत ने जांच पूरी करने की अवधि को 18 मई तक बढ़ाया था क्योंकि तब भी लैब रिपोर्ट नहीं मिल सकी थी। अब, जब रिपोर्ट अपने अंतिम चरण में है, उम्मीद की जा रही है कि अगले दो हफ्तों के भीतर इस बड़े मंदिर विवाद का सच सामने आ जाएगा।

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