इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सेवा नियमों के तहत कोई भी सरकारी कर्मचारी अपने चौथे बच्चे के जन्म पर मातृत्व अवकाश पाने की हकदार नहीं है। इस आधार पर कोर्ट ने छह महीने के मातृत्व अवकाश की मांग को लेकर दाखिल की गई एक महिला कर्मचारी की याचिका खारिज कर दी।
खंड शिक्षा अधिकारी के आदेश को दी गई थी चुनौती
जस्टिस मंजू रानी चौहान ने 7 अगस्त को यह फैसला सुनाते हुए संभल (भीम नगर) के खंड शिक्षा अधिकारी के 19 जून के आदेश को सही ठहराया। खंड शिक्षा अधिकारी ने याचिकाकर्ता शशि कुमारी के चौथे बच्चे के लिए छह महीने का मातृत्व अवकाश मांगने वाले आवेदन को निरस्त कर दिया था।
शशि कुमारी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस प्रशासनिक आदेश को रद्द करने और संबंधित अधिकारियों को कानूनी प्रावधानों के तहत छह महीने का मातृत्व अवकाश स्वीकृत करने का निर्देश देने की गुहार लगाई थी।
दलीलों में पहले अवकाश न लेने का दावा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि शशि कुमारी ने अपने पहले तीन बच्चों के जन्म के समय कभी भी मातृत्व अवकाश का लाभ नहीं लिया था। ऐसे में वह पहली बार इस कानूनी सुविधा की मांग कर रही हैं, इसलिए शिक्षा अधिकारी द्वारा आवेदन खारिज करना मनमाना और गैर-कानूनी है।
राज्य सरकार का विरोध और कोर्ट का निर्णय
राज्य सरकार के वकील ने इस याचिका का जोरदार विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा नियमावली के अनुसार चौथे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश देने का कोई नियम नहीं है, इसलिए इसमें अदालत के हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं बनता। इसके साथ ही सरकारी वकील ने याचिका में दिए गए विवरणों का उल्लेख करते हुए बताया कि याचिकाकर्ता पहले भी मातृत्व अवकाश का लाभ ले चुकी हैं।
राज्य पक्ष के तर्कों को ऑन रिकॉर्ड लेते हुए हाईकोर्ट ने माना कि खंड शिक्षा अधिकारी के आदेश में हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है और याचिका को पूरी तरह से डिस्मिस कर दिया।

