सबरीमाला सोना गायब मामला: केरल हाईकोर्ट ने पूर्व टीडीबी अध्यक्ष और दो अन्य आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की

केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को सबरीमाला मंदिर में सोना गायब होने से जुड़ी दो महत्वपूर्ण मामलों में आरोपी पूर्व त्रावणकोर देवास्वम बोर्ड (TDB) अध्यक्ष ए. पद्मकुमार, पूर्व प्रशासकीय अधिकारी बी. मुरारी बाबू और कर्नाटक के एक जौहरी रॉडम पांडुरंगैया नागा गोवर्धन की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

न्यायमूर्ति ए. बधरुद्दीन की एकल पीठ ने तीनों को कोई राहत देने से इनकार कर दिया। विस्तृत आदेश और कारण फिलहाल अदालत द्वारा जारी नहीं किए गए हैं।

यह फैसला विशेष रूप से बी. मुरारी बाबू के लिए झटका है, जिनकी पहले भी दिसंबर 2025 में जमानत याचिका खारिज हो चुकी थी। उन्होंने जनवरी 2026 में दोबारा जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था।

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यह मामला प्रसिद्ध सबरीमाला श्री अयप्पा मंदिर के द्वारपालक मूर्तियों और श्रीकोविल (गर्भगृह) के दरवाजों से संबंधित सोने के गायब होने से जुड़ा है। आरोप है कि मंदिर की मरम्मत और सजावट के दौरान इस्तेमाल हुआ कीमती सोना गायब कर दिया गया।

इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) अब तक दो पूर्व टीडीबी अध्यक्षों सहित कुल 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुका है। जांच में घोटाले और सोने के गबन की आशंका जताई गई है।

SIT की जांच के चलते कई वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए यह मामला राज्यभर में चिंता का विषय बन गया है।

हाईकोर्ट का आदेश ऐसे समय आया है जब SIT लगातार सबूत जुटा रही है और आरोपियों से पूछताछ कर रही है। अदालत के विस्तृत आदेश से यह स्पष्ट होगा कि जमानत क्यों नहीं दी गई और जांच में अभी तक क्या तथ्य सामने आए हैं।

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मामले की अगली सुनवाई और SIT की कार्रवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।

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