पंजाब के उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक्सपायरी डेट निकलने के एक दिन बाद शीतल पेय (कोल्ड ड्रिंक) की बोतल बेचने के मामले में एक रिटेल स्टोर को 10,000 रुपये का हर्जाना भरने और उत्पाद के 69 रुपये लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने विक्रेता को सेवा में गंभीर कोताही और अनुचित व्यापार व्यवहार (अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस) अपनाने का दोषी ठहराया।
आयोग के अध्यक्ष संजीव बत्रा और सदस्य मोनिका भगत की पीठ ने 8 सितंबर को फैसला सुनाते हुए कहा कि विक्रेता के इस कृत्य से खरीदार को न केवल आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि उसे मानसिक प्रताड़ना और आघात भी सहना पड़ा। पीठ ने कहा कि एक्सपायर हो चुके उत्पाद को बिक्री के लिए रखना सुरक्षा मानकों की अनदेखी है और स्टोर प्रबंधन भली-भांति जानता था कि यह पेय जनसाधारण के उपभोग के लिए असुरक्षित था।
स्टॉक और बैच का रिकॉर्ड पेश करने में नाकाम रहा स्टोर
सुनवाई के दौरान रिटेलर ने दावा किया था कि उसके पास स्वचालित बिलिंग और आधुनिक इन्वेंट्री प्रबंधन प्रणाली मौजूद है। इस पर आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि स्टोर के पास ऐसी उन्नत प्रणाली थी, तो वह संबंधित इनवॉयस से जुड़े उत्पाद का बैच नंबर, निर्माण तिथि और एक्सपायरी विवरण अदालत में क्यों नहीं पेश कर सका। आयोग ने पाया कि विक्रेता ने अपने अधिकार में मौजूद सबसे अहम दस्तावेजी सबूत को जानबूझकर छिपाया, जिससे उसका यह बचाव खारिज हो गया।
घर पहुंचकर देखा तो एक दिन पहले बीत चुकी थी अंतिम तारीख
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता महिला ने 30 जुलाई 2025 को संबंधित रिटेल आउटलेट से 116.05 रुपये का घरेलू सामान खरीदा था। इसमें 69.30 रुपये कीमत वाली कोल्ड ड्रिंक की एक बोतल भी शामिल थी। घर लौटने पर उन्होंने पाया कि बोतल पर ‘बेस्ट बिफोर’ (उपभोग की अंतिम तिथि) 29 जुलाई 2025 दर्ज थी, यानी उत्पाद खरीद की तारीख से एक दिन पहले ही एक्सपायर हो चुका था।
उपभोक्ता ने पहले स्टोर प्रबंधन से संपर्क किया और बाद में कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। शिकायत में शीतल पेय की राशि वापसी के साथ 2 लाख रुपये का मुआवजा और 3,500 रुपये कानूनी खर्च दिलाने की मांग की गई थी।
रिटेलर ने लगाया था मिलीभगत का आरोप
जवाब में रिटेल कंपनी ने तर्क दिया कि केवल खरीद रसीद पेश करने से यह साबित नहीं होता कि तस्वीर में दिख रही एक्सपायरी बोतल उसी लेनदेन का हिस्सा थी। स्टोर का कहना था कि यह बोतल किसी पुरानी खरीद या किसी अन्य दुकान से भी ली गई हो सकती है। रिटेलर ने यह आरोप भी लगाया कि यह शिकायत भारी मुआवजा हासिल करने के मकसद से गढ़े गए मामलों की कड़ी का हिस्सा है, जहां असली बिलों के साथ पुराने उत्पाद जोड़कर दावे किए जाते हैं।
आयोग ने विक्रेता की इन तमाम दलीलों को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। आयोग ने रिटेलर को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को कोल्ड ड्रिंक के 69 रुपये वापस करे और मानसिक क्षति व मुकदमे के खर्च के मद में 10,000 रुपये का भुगतान करे।

