मद्रास हाईकोर्ट ने खारिज की द्रमुक नेता ए. वी. वेलु के निर्वाचन के खिलाफ याचिका, जीत का अंतर रहा निर्णायक

मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुवन्नामलाई विधानसभा सीट से द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (द्रमुक) के वरिष्ठ नेता ए. वी. वेलु के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस तथ्यात्मक आधार या ऐसा कानूनी कारण प्रस्तुत करने में विफल रहा, जिस पर नियमित सुनवाई की जा सके।

जस्टिस डी. भरत चक्रवर्ती ने 16 सितंबर को जारी आदेश में कहा कि मतगणना के दौरान 955 डाक मतपत्रों (पोस्टल बैलेट) का खारिज होना यद्यपि असामान्य और चिंताजनक है, लेकिन यदि इन सभी मतों को याचिकाकर्ता के खाते में भी जोड़ दिया जाए, तब भी वेलु की 2,455 मतों की जीत के अंतर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

राज्य में इस वर्ष 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव कराए गए थे और 4 मई को मतगणना हुई थी। इस चुनाव में द्रमुक उम्मीदवार ए. वी. वेलु ने 88,273 वोट पाकर जीत हासिल की थी, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के प्रत्याशी अरुल अरुमुगम को 85,818 मत मिले थे।

READ ALSO  बिना बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर नहीं मिलेगा ईंधन, सुप्रीम कोर्ट ने दिए पायलट प्रोजेक्ट और नए नियमों के निर्देश

ठोस साक्ष्यों और कानूनी आधार का अभाव

जस्टिस चक्रवर्ती ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि याचिका में कई गंभीर आरोप लगाए गए, लेकिन यह साबित नहीं किया जा सका कि कथित अनियमितताओं से चुनावी परिणाम किस प्रकार दूषित हुआ। कोर्ट ने पाया कि भ्रष्ट आचरण से जुड़े आरोपों में न तो आवश्यक विवरण दिए गए थे और न ही उनके समर्थन में अनिवार्य हलफनामा पेश किया गया था।

अदालत ने कहा कि विस्तृत दलीलों के बावजूद चुनाव याचिका में कोई ऐसा अकाट्य तथ्य सामने नहीं आया जो सुनवाई योग्य मुद्दा बनाता हो। लिहाजा, पर्याप्त कानूनी कारण के अभाव में इन दलीलों को रिकॉर्ड से हटाते हुए याचिका को खारिज किया जाना ही उचित है।

सुनवाई के दौरान वेलु की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने याचिका को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज करने की मांग की थी। उन्होंने दलील दी कि यह याचिका केवल अस्पष्ट आरोपों पर टिकी है और इसमें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 83 के तहत अनिवार्य विशिष्ट तथ्यों और विवरणों का अभाव है।

READ ALSO  कौशल विकास घोटाला मामला: नायडू की जमानत के खिलाफ आंध्र प्रदेश सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 26 फरवरी को सुनवाई करेगा

ईवीएम और प्रक्रियागत अनियमितताओं के आरोप

याचिकाकर्ता अरुल अरुमुगम की ओर से पेश हुए अधिवक्ता बी. अरविंद स्रेवस्ता ने नामांकन पत्रों की जांच, मतदान, डाक मतपत्रों के मूल्यांकन और ईवीएम तथा वीवीपीएटी के संचालन में गंभीर प्रक्रियागत खामियों का दावा किया था।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि वेलु की घोषित उम्र में विसंगतियां थीं और उन्होंने अपने 2021 के चुनावी हलफनामे में दर्ज नौ आपराधिक मामलों का इस बार के नामांकन में खुलासा नहीं किया था। इसके अलावा नामांकन पत्रों की जांच के दौरान द्रमुक कार्यकर्ताओं द्वारा अनुचित आचरण करने और रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा संक्षिप्त जांच किए बिना आदेश पारित करने के आरोप भी लगाए गए थे।

अरुमुगम ने मतदान केंद्र संख्या 153 और 197 पर ईवीएम बदले जाने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार इन दोनों बूथों पर उन्हें अधिक वोट मिले थे। याचिका में यह भी कहा गया कि मतगणना केंद्र पर जहां अन्य सभी पर प्रतिबंध था, वहीं वेलु से जुड़े दो लोगों को मोबाइल फोन ले जाने और वीडियो कॉल करने की छूट दी गई थी।

READ ALSO  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंसूर अंसारी की संपत्ति की कुर्की रद्द की, कहा- अपराध और संपत्ति के बीच संबंध साबित करना जरूरी

मंत्री सेनगोट्टैयन के खिलाफ दायर याचिका भी निरस्त

इससे पहले 15 सितंबर को दिए एक अन्य फैसले में मद्रास हाईकोर्ट ने गोबीचेट्टीपलायम सीट से टीवीके के मंत्री के. ए. सेनगोट्टैयन के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका भी खारिज कर दी थी।

उस मामले में जस्टिस जी. के. इलंतरैयन ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि सेनगोट्टैयन के फॉर्म 26 हलफनामे पर नोटरी के सत्यापन की वैधता को लेकर उठाए गए सवालों से यह सिद्ध नहीं होता कि इस तकनीकी त्रुटि ने चुनाव परिणाम को कैसे प्रभावित किया। फॉर्म 26 के तहत प्रत्याशी को अपनी संपत्ति, देनदारियों, शैक्षणिक योग्यता, सार्वजनिक बकाए और आपराधिक पृष्ठभूमि का पूरा ब्योरा देना होता है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles