मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने सबूत दबाने के लिए डीआईजी पर विभागीय जांच के आदेश दिए, ₹5 लाख का जुर्माना भी लगाया

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने 2017 में दतिया जिले में हुई एक हत्या के मामले में अहम साक्ष्य छुपाने पर एक वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायालय ने उस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं और ₹5 लाख का व्यक्तिगत जुर्माना भी लगाया है। इसके साथ ही, अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को यह विचार करने का निर्देश दिया है कि क्या ऐसे अधिकारी पुलिस सेवा में बने रहने योग्य हैं या नहीं।

16 अप्रैल 2025 को पारित आदेश में, ग्वालियर खंडपीठ के न्यायमूर्ति जी.एस. अहलुवालिया ने यह पाया कि मयंक अवस्थी, जो उस समय दतिया के पुलिस अधीक्षक (SP) थे और वर्तमान में पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) के पद पर कार्यरत हैं, ने “जानबूझकर जांच में बाधा डाली और ट्रायल कोर्ट को गुमराह किया, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ।”

मामला क्या है?

यह मामला 24 सितंबर 2017 को दतिया जिले के दीपर थाना क्षेत्र में हुई एक हत्या से संबंधित है। याचिकाकर्ता मनवेन्द्र गुर्जर, जो इस मामले में आरोपी हैं, ने अभियोजन पक्ष के इस दावे को चुनौती दी कि घटना उसी दिन और स्थान पर हुई थी। उनका कहना है कि घटना के दिन वह कहीं और थे और मृतक, घायल और एक प्रमुख गवाह अमायन (भिंड) जिले में थे, न कि दतिया में।

गुर्जर का दावा है कि उन्होंने अपने बचाव में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मोबाइल टावर लोकेशन डेटा संरक्षित करने और प्रस्तुत करने के अनुरोध किए थे। ट्रायल कोर्ट ने 7 सितंबर 2018 को इस डेटा को सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया था। लेकिन पुलिस ने बाद में कोर्ट को सूचित किया कि लोकेशन डेटा सुरक्षित नहीं रखा गया, जिसके कारण ट्रायल कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया।

जब हाई कोर्ट ने जवाब मांगा तो दीपर थाना प्रभारी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए। इसके बाद IPS अधिकारी अवस्थी से जवाब तलब किया गया, लेकिन उन्होंने भी विश्वसनीय उत्तर नहीं दिया।

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कोर्ट की टिप्पणियाँ और आदेश

कोर्ट ने अपने कड़े शब्दों वाले आदेश में कहा:

“उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है। एक परिवार ने अपना सदस्य खोया है, वहीं दूसरा परिवार ऐसे आरोपों का सामना कर रहा है, जो आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक पहुंच सकते हैं।”

न्यायालय ने अवस्थी पर ₹5 लाख का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया और आदेश दिया कि यह राशि एक महीने के भीतर जमा की जाए। यदि आदेश का पालन नहीं किया गया, तो बाध्यकारी वसूली की कार्रवाई और अवमानना कार्यवाही शुरू की जाएगी। यह राशि उस पक्ष को दी जाएगी जो मामले में सफल होगा।

कोर्ट ने DIG अवस्थी के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश भी दिए और कहा कि जांच यह स्पष्ट करे कि उनके “उद्देश्य और संभावित कदाचार” क्या थे।

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न्यायालय ने DGP को यह भी निर्देश दिया:

“यह पुलिस महानिदेशक का दायित्व है कि वह यह तय करें कि क्या ऐसे व्यक्ति पुलिस बल में बनाए रखने योग्य हैं।”

अन्य निर्देश

  • दतिया के वर्तमान पुलिस अधीक्षक को 10 दिनों के भीतर संबंधित CDR और मोबाइल लोकेशन रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • पुलिस महानिदेशक को यह निर्देश दिया गया है कि वे 20 मई 2025 तक अनुपालन की स्थिति और जांच की प्रगति के बारे में अदालत को अवगत कराएं।

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