मणिपुर हिंसा मामले: सुप्रीम कोर्ट ने CBI व SIT को पीड़ितों को चार्जशीट देने का निर्देश दिया; मुफ्त कानूनी सहायता और निगरानी पैनल को अंतरिम मानदेय का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने 2023 की मणिपुर जातीय हिंसा से जुड़े मामलों में गुरुवार को महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए CBI और राज्य की SIT को पीड़ितों एवं उनके परिजनों को दायर की गई चार्जशीट की प्रतियां उपलब्ध कराने का आदेश दिया। न्यायालय ने प्रत्येक पीड़ित को मुफ्त कानूनी सहायता, गुवाहाटी में मुकदमे में भाग लेने के लिए यात्रा-व्यय और न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति तथा पूर्व महाराष्ट्र डीजीपी दत्तात्रेय पदसालगिकर को अंतरिम मानदेय देने के भी निर्देश दिए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने ये निर्देश पूर्व महाराष्ट्र पुलिस प्रमुख दत्तात्रेय पदसालगिकर की 12वीं स्थिति रिपोर्ट पर विचार करने के बाद जारी किए। पदसालगिकर को हिंसा से जुड़े आपराधिक मामलों की जांच की निगरानी का दायित्व सौंपा गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, CBI ने 20 मामलों में विशेष अदालत के समक्ष चार्जशीट दाखिल कर दी है, जबकि छह अन्य FIR की जांच जारी है और अगले छह माह में पूरी होने की संभावना है। पीठ ने CBI को शेष मामलों की जांच निर्धारित समय में पूरी कर चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया।

वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर की इस दलील पर कि पीड़ितों और उनके परिवारों को मामलों की स्थिति की जानकारी नहीं है, न्यायालय ने CBI और राज्य SIT को प्रभावित व्यक्तियों को चार्जशीट की प्रतियां देने का आदेश दिया।

पीठ ने स्पष्ट किया कि उसने “चार्जशीट का न तो अवलोकन किया है और न ही उसके गुण-दोष पर कोई टिप्पणी की है”, इसलिए पीड़ित विशेष अदालत के समक्ष अपनी सभी आपत्तियां उठा सकते हैं।

READ ALSO  Supreme Court Eases Air Pollution Curbs in Delhi NCR as Air Quality Improves

न्यायालय ने मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और असम राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रत्येक पीड़ित को मुफ्त अधिवक्ता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, जो स्थानीय भाषा में दक्ष हों।

अदालत ने आगे निर्देश दिया कि:

  • मणिपुर SLSA गुवाहाटी जाने वाले विधिक सहायता वकीलों के यात्रा और ठहरने का खर्च वहन करेगा
  • मुकदमे में उपस्थित होने के लिए पीड़ित और प्रत्येक मामले में एक पारिवारिक सदस्य के यात्रा एवं ठहरने का खर्च भी विधिक सेवा प्राधिकरण उठाएगा
  • विधिक सहायता वकील परिस्थितियों के अनुसार लोक अभियोजक के साथ या स्वतंत्र रूप से विशेष अदालत की सहायता कर सकेंगे
READ ALSO  Allahabad HC ने कहा नाम बदलने का अधिकार मौलिक अधिकार है

पीठ ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह भी कहा कि गुवाहाटी स्थित ट्रायल कोर्ट के समक्ष पीड़ितों के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बयान दर्ज कराने की पूर्व अनुमति जारी रहेगी।

पीठ ने इस बात पर असंतोष व्यक्त किया कि राहत एवं पुनर्वास की निगरानी कर रही पूर्व जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति और पदसालगिकर को अब तक कोई मानदेय नहीं दिया गया।

अदालत ने कहा:

“हम यह जानकर निराश हैं कि अब तक उनके यात्रा और कार्य का कोई प्रतिपूर्ति नहीं की गई है।”

अंतरिम व्यवस्था के रूप में न्यायालय ने निर्देश दिया:

  • न्यायमूर्ति गीता मित्तल को ₹12 लाख
  • न्यायमूर्ति शालिनी पी. जोशी (पूर्व बॉम्बे हाईकोर्ट न्यायाधीश) और न्यायमूर्ति आशा मेनन (पूर्व दिल्ली हाईकोर्ट न्यायाधीश) को ₹10-10 लाख
  • दत्तात्रेय पदसालगिकर को ₹10 लाख

न्यायालय ने कहा कि अंतिम मानदेय बाद में तय किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट पहले ही इन मामलों के ट्रायल को मणिपुर से स्थानांतरित कर गुवाहाटी भेज चुका है। 13 फरवरी को अदालत ने जांच की प्रगति पर स्थिति रिपोर्ट मांगी थी।

सुनवाई के दौरान वृंदा ग्रोवर ने एक दिवंगत महिला पीड़िता की ओर से उनकी मां को पक्षकार बनाने का अनुरोध करते हुए कहा कि CBI ने उसे यह भी नहीं बताया था कि उसके बलात्कार मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उक्त महिला की पिछले महीने बीमारी से मृत्यु हो गई, जो कथित तौर पर घटना के आघात से जुड़ी थी।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने मिर्जापुर वेबसीरिज मेकर और अमेजन प्राइम को छवि धूमिल करने के आरोप में नोटिस जारी किया

मामले को आगे के निर्देशों के लिए मार्च के तीसरे सप्ताह में सूचीबद्ध किया गया है।

मणिपुर में जातीय हिंसा 3 मई 2023 को “ट्राइबल सॉलिडेरिटी मार्च” के दौरान शुरू हुई थी, जिसमें मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग का विरोध किया गया था। हिंसा में 200 से अधिक लोगों की मौत, सैकड़ों घायल और हजारों लोग विस्थापित हुए।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles