‘एक दिन पहले याद आया’: बकरीद से ठीक पहले गोहत्या बैन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का तुरंत सुनवाई से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस जनहित याचिका (PIL) पर तुरंत सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया, जिसमें आगामी बकरीद त्योहार से पहले देश भर में गोहत्या रोधी कानूनों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई थी।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की अवकाशकालीन पीठ (Vacation Bench) ने याचिका दायर करने के समय पर सवाल उठाते हुए इसे तुरंत सूचीबद्ध (list) करने का अनुरोध खारिज कर दिया।

सुनवाई के दौरान पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “आपको त्योहार से ठीक एक दिन पहले इसकी याद आई। इसमें कोई जल्दबाजी नहीं है। धन्यवाद।”

आखिरी वक्त पर सुनवाई की कोशिश

यह मामला वकील बरुण कुमार सिन्हा द्वारा अदालत के समक्ष लाया गया था। उन्होंने पीठ से अनुरोध किया था कि इस मामले को बुधवार को ही सुनवाई के लिए रखा जाए, क्योंकि त्योहार बेहद नजदीक है।

अदालत में दलील देते हुए सिन्हा ने कहा, “परसों बकरीद है। यह याचिका देश में गोहत्या रोधी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए है। अगर इसे कल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सके तो बेहतर होगा।”

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और नियमित प्रक्रियाओं को छोड़कर मामले को तुरंत सुनने की आवश्यकता से असहमति जताई।

क्या है याचिकाकर्ता की मांग?

यह जनहित याचिका अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल की ओर से दायर की गई है। इस याचिका का मुख्य उद्देश्य गायों और उनके वंशजों को कटने से बचाने के लिए मौजूदा कानूनों को कड़ाई से लागू करवाना है।

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याचिका में केवल त्योहार के मद्देनजर ही नहीं, बल्कि एक स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता चाहते हैं कि अदालत सभी राज्य सरकारों को निर्देश जारी करे, ताकि वे अपने-अपने राज्यों में बूचड़खानों (slaughterhouses) को विनियमित करने के लिए कानून के तहत स्पष्ट दिशा-निर्देश तय और अधिसूचित करें।

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