साइज बदलने के नाम पर धोखा: मिंत्रा पर लगा जुर्माना, जूते पर नकली लेबल लगाकर भेजने का मामला

करनाल जिला उपभोक्ता आयोग ने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म मिंत्रा और एक तीसरे पक्ष के विक्रेता को सेवा में कोताही और कमी का दोषी पाया है। आयोग ने यह कदम एक ग्राहक को जूते का सही आकार (साइज) भेजने के बजाय पुराने जूते पर ही दूसरे साइज का स्टीकर चिपकाकर थमा देने के मामले में उठाया है। आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह, सदस्य नीरू अग्रवाल और सरवजीत कौर की तीन सदस्यीय पीठ ने दोनों पक्षों को जूते के पैसे लौटाने के साथ-साथ उपभोक्ता को मानसिक प्रताड़ना और अदालती खर्च के लिए मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।

आयोग ने अपने फैसले में दोनों पक्षों को संयुक्त रूप से शिकायतकर्ता को जूतों की मूल कीमत 1,029 रुपये रिफंड करने का निर्देश दिया है। इसके अतिरिक्त, उपभोक्ता को हुई परेशानी और कानूनी खर्च की भरपाई के तौर पर 1,000 रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश जारी किया गया है।

शिकायतकर्ता के आरोप और धोखाधड़ी का खेल

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब पीड़ित उपभोक्ता ने मिंत्रा से ‘कैश ऑन डिलीवरी’ विकल्प का उपयोग करते हुए 8 नंबर के जूते खरीदे थे। साइज बड़ा होने के कारण ग्राहक ने इसे बदलकर 7 नंबर का जूता भेजने का अनुरोध किया। जब 5 जुलाई 2025 को बदले हुए जूतों का पैकेट ग्राहक को मिला, तो वह हैरान रह गया। पैकेट खोलने पर पता चला कि कंपनी ने वही 8 नंबर के जूते वापस भेज दिए थे और चालाकी से मूल साइज लेबल के ऊपर 7 नंबर का एक नया स्टीकर चिपका दिया था।

धोखाधड़ी का पता चलते ही शिकायतकर्ता ने उसी दिन यानी 5 जुलाई 2025 को मिंत्रा के कस्टमर केयर से संपर्क साधा। हालांकि कस्टमर केयर ने गलती स्वीकार करते हुए दोबारा जूते बदलने का भरोसा दिया, लेकिन पीड़ित ने ईमेल के जरिए भी शिकायत दर्ज कराई। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने शुरू से ही उनके साथ धोखाधड़ी करने की नीयत से जानबूझकर गलत साइज का स्टीकर लगाया था।

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मिंत्रा की शॉपिंग मॉल वाली दलील नामंजूर

सुनवाई के दौरान ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मिंत्रा ने लिखित जवाब दाखिल कर अपना बचाव करने की कोशिश की। कंपनी ने तर्क दिया कि वह केवल एक ऑनलाइन मंच या मध्यस्थ की भूमिका निभाती है, जो स्वतंत्र तीसरे पक्ष के विक्रेताओं और ग्राहकों को आपस में जोड़ता है। मिंत्रा ने अपनी तुलना एक भौतिक शॉपिंग मॉल से की और दलील दी कि जिस तरह मॉल में बिकने वाले किसी भी दोषपूर्ण सामान के लिए मॉल का मालिक जिम्मेदार नहीं होता बल्कि दुकान का मालिक होता है, उसी तरह इस मामले में भी केवल तीसरे पक्ष का विक्रेता ही जिम्मेदार है।

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हालांकि, उपभोक्ता आयोग ने मिंत्रा की इस दलील को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया। आयोग ने प्रस्तुत की गईं तस्वीरों और सबूतों का हवाला देते हुए 2 जुलाई को कहा कि उपभोक्ता ने मिंत्रा के प्लेटफॉर्म का उपयोग करके ही खरीदारी और एक्सचेंज की प्रक्रिया पूरी की थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि ग्राहक को सही साइज का सामान देना या उसके पैसे वापस करना मिंत्रा और विक्रेता दोनों का संयुक्त कर्तव्य था, जिसमें वे पूरी तरह विफल रहे।

सुनवाई से गायब रहा जूता विक्रेता

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इस पूरे मामले में जूता बेचने वाले मुख्य विक्रेता ने आयोग की कार्यवाही में कोई भागीदारी नहीं की। नोटिस मिलने के बावजूद विक्रेता आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। इसके चलते आयोग ने 4 नवंबर 2025 को एक आदेश जारी कर विक्रेता के खिलाफ एकतरफा (एक्स-पार्टी) कार्यवाही करने का फैसला किया। आयोग ने अपने अंतिम आदेश में भी उल्लेख किया कि विक्रेता ने शिकायतकर्ता के आरोपों का खंडन करने के लिए अपनी तरफ से कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।

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