अयोध्या राम मंदिर दान मामला: जांच की मांग वाली याचिका पर हाईकोर्ट का सुनवाई से इनकार, सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में कथित वित्तीय हेराफेरी की स्वतंत्र जांच कराने की मांग को टाल दिया है। सोमवार को हाईकोर्ट ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि ठीक इसी मुद्दे पर देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही सुनवाई चल रही है, इसलिए हाईकोर्ट इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा।

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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला ने याचिकाकर्ता मोहित अशोक की ओर से दायर इस जनहित याचिका को निस्तारित (निपटाया) कर दिया। अदालत ने याचिका में लगाए गए आरोपों के गुण-दोष पर विचार करने से पूरी तरह परहेज किया और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का हवाला देते हुए इस कार्रवाई को समाप्त कर दिया।

कैग ऑडिट और स्वतंत्र जांच की थी मांग

याचिकाकर्ता मोहित अशोक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर मांग की थी कि राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए पैसे और अन्य दान के कथित गबन की निष्पक्ष एजेंसी से स्वतंत्र जांच कराई जाए। इसके साथ ही, याचिका में मंदिर के वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड की पारदर्शिता जांचने के लिए भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से एक औपचारिक ऑडिट कराने के निर्देश देने की भी गुहार लगाई गई थी।

चूंकि सुप्रीम कोर्ट इन सभी पहलुओं पर पहले से ही गंभीरता से विचार कर रहा है, इसलिए हाईकोर्ट ने इस विषय पर किसी समानांतर जांच या सुनवाई की आवश्यकता नहीं समझी और इस याचिका पर आगे कोई भी कार्रवाई करने से मना कर दिया।

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