गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री निजी जानकारी की श्रेणी में आती है और इसका खुलासा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने इस संबंध में पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका खारिज कर दी।
चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डी एन रे की डिवीजन बेंच ने 29 सितंबर के फैसले में कहा कि केवल इसलिए कि मांगी गई निजी जानकारी देश के प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी है, वह अपने आप जनहित या व्यापक जनहित के दायरे में नहीं आ जाती।
कोर्ट ने RTI Act की धारा 8(1)(e) और 8(1)(j) का उल्लेख किया, जिनके तहत फिड्यूशियरी संबंध और निजी जानकारी से जुड़े मामलों में सूचना के खुलासे से छूट दी गई है।
CIC के निर्देश RTI की छूट वाली धाराओं के खिलाफ
हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग के उन निर्देशों पर विचार किया, जिनमें प्रधानमंत्री कार्यालय को प्रधानमंत्री की डिग्री और पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री का वर्ष और संबंधित विवरण दिल्ली यूनिवर्सिटी तथा गुजरात यूनिवर्सिटी को उपलब्ध कराने को कहा गया था, ताकि विश्वविद्यालय संबंधित दस्तावेज खोज सकें।
कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालयों के पब्लिक इंफॉर्मेशन ऑफिसर को डिग्री से जुड़े दस्तावेज तलाशने और उपलब्ध कराने का निर्देश सीधे तौर पर RTI Act की धारा 8(1)(e) और 8(1)(j) के तहत दी गई छूट से प्रभावित है।
बेंच ने कहा कि जिन सूचनाओं के खुलासे का निर्देश दिया गया था, उनमें से किसी को भी जनहित या व्यापक जनहित में आवश्यक नहीं माना जा सकता।
जानकारी पहले से सार्वजनिक होना निर्णायक नहीं
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि CIC द्वारा यह दर्ज किया जाना कि प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री से संबंधित जानकारी पहले से सार्वजनिक डोमेन में मौजूद है, RTI Act के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण की कानूनी जिम्मेदारियों के निर्धारण में प्रासंगिक नहीं है।
कोर्ट के मुताबिक, किसी जानकारी का सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध होना अपने आप यह तय नहीं करता कि RTI Act के तहत उसका खुलासा करना जरूरी है।
सार्वजनिक पद पर होने से निजता का अधिकार खत्म नहीं होता
बेंच ने कहा कि कोई व्यक्ति केवल सार्वजनिक पद पर होने के कारण अपनी निजी जानकारी की सुरक्षा से वंचित नहीं हो जाता।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक सार्वजनिक सेवक भी देश का नागरिक है और केवल इस आधार पर उससे निजी जानकारी का खुलासा नहीं कराया जा सकता कि वह किसी सार्वजनिक पद पर है। ऐसा तभी किया जा सकता है जब उस पर कानून के तहत जानकारी देने की जिम्मेदारी हो या जिस सार्वजनिक प्राधिकरण के पास वह सूचना उपलब्ध है, उस पर RTI Act के तहत उसका खुलासा करने का दायित्व हो।
इन निष्कर्षों के साथ गुजरात हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री मोदी की शैक्षणिक योग्यता से संबंधित जानकारी के खुलासे की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।

