वक्फ (संशोधन) विधेयक लोकसभा में लंबे बहस के बाद पारित

गुरुवार, 2 अप्रैल की तड़के लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक पारित कर दिया गया। यह विधेयक लगभग 12 घंटे लंबी बहस के बाद पारित हुआ, जिसमें 288 सांसदों ने इसके पक्ष में और 232 ने विरोध में मतदान किया।

गर्मागरम बहस के दौरान एनडीए ने इस विधेयक को अल्पसंख्यक समुदायों के लिए लाभकारी बताया, जबकि विपक्षी दलों ने इसे मुस्लिम विरोधी करार दिया। विपक्ष की ओर से लाए गए सभी संशोधनों को ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक का जोरदार बचाव करते हुए कहा कि दुनिया में भारत से अधिक सुरक्षित कोई जगह अल्पसंख्यकों के लिए नहीं है और इसका श्रेय बहुसंख्यक समुदाय की धर्मनिरपेक्ष सोच को जाता है। उन्होंने कहा, “जब यह विधेयक कानून बनेगा, तो करोड़ों गरीब मुसलमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करेंगे।”

विधेयक पर चली लंबी बहस विवादों से भी अछूती नहीं रही। विपक्षी सदस्यों ने इसे “मुस्लिम विरोधी” बताया, जिसे रिजिजू ने सिरे से खारिज किया और कहा कि कुछ नेता गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सभी मुद्दों पर स्पष्टता से बात रखने के बावजूद सच्चाई स्वीकारने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा, “विधेयक को ‘असंवैधानिक’ कहना बेहद आसान बना दिया गया है। अगर यह सच में असंवैधानिक होता, तो अदालत इसे खारिज कर चुकी होती।”

वक्फ (संशोधन) विधेयक का उद्देश्य 1995 के अधिनियम की कमियों को दूर करते हुए वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना है। इसमें वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की प्रक्रिया को बेहतर बनाने और तकनीक के माध्यम से रिकॉर्ड प्रबंधन को सुदृढ़ करने का प्रावधान है।

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लोकसभा से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां इसके लिए आठ घंटे की बहस निर्धारित की गई है। राज्यसभा में भी इस पर लंबा और तीखा संवाद होने की संभावना जताई जा रही है।

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