केरल में निजी अस्पतालों की नर्सों की जारी हड़ताल के मामले में शुक्रवार को केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश सुनाया। कोर्ट ने निजी अस्पताल प्रबंधन को हड़ताली नर्सों के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की अनुमति दे दी है। यह फैसला तब आया जब दोनों पक्षों के बीच चल रही मेडिएशन (मध्यस्थता) की प्रक्रिया पूरी तरह विफल हो गई।
जस्टिस हरिशंकर वी मेनन ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जहां एक ओर अस्पतालों को कानूनी कार्रवाई की छूट दी गई है, वहीं दूसरी ओर नर्सों के पास भी अपनी हड़ताल जारी रखने का अधिकार सुरक्षित है।
यह कानूनी विवाद यूनाइटेड नर्सेज एसोसिएशन (UNA) द्वारा 11 मार्च से शुरू की गई अनिश्चितकालीन राज्यव्यापी हड़ताल से जुड़ा है। नर्सों की मुख्य मांग निजी अस्पतालों में न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाकर ₹40,000 प्रति माह करने की है।
इससे पहले 13 मार्च को हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी बातचीत से समाधान निकालने के लिए मेडिएशन का निर्देश दिया था। उस समय कोर्ट ने दोनों पक्षों को ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचने को कहा था जिससे विवाद और गहरा जाए। इसी निर्देश के कारण अस्पताल नर्सों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर पा रहे थे। हालांकि, शुक्रवार को कोर्ट को सूचित किया गया कि मेडिएशन का प्रयास सफल नहीं रहा और कम से कम दो अस्पतालों में नर्सों का प्रदर्शन अब भी जारी है।
जस्टिस हरिशंकर वी मेनन ने उल्लेख किया कि कोर्ट का पिछला निर्देश इस उम्मीद पर आधारित था कि मेडिएशन के दौरान नर्सें अपनी हड़ताल वापस ले लेंगी। चूंकि बातचीत विफल हो गई है, इसलिए कोर्ट ने अस्पताल प्रबंधन की उस दलील को जायज माना जिसमें उन्होंने अनुशासनात्मक कार्यवाही की अनुमति मांगी थी।
कोर्ट ने कहा, “इस कोर्ट ने यह भी संज्ञान लिया है कि हालांकि मेडिएशन का प्रयास किया गया था, लेकिन वह विफल रहा। इसलिए, मेरी राय में, प्रथम दृष्टया इन रिट याचिकाओं में याचिकाकर्ता (निजी अस्पताल प्रबंधन) यह तर्क देने में सही हैं कि उन्हें कानून के अनुसार हड़ताली नर्सों के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की अनुमति दी जा सकती है।”
इसके साथ ही कोर्ट ने 13 मार्च के आदेश में लगाई गई रोक को हटा लिया। हालांकि, संतुलन बनाए रखते हुए जज ने यह भी कहा, “इस आधार पर, यह कोर्ट यह भी मानती है कि प्रतिवादी यूनियन (एसोसिएशन) अपनी हड़ताल जारी रखने की हकदार होगी, यदि वे ऐसा करना चाहें।”
इस हड़ताल के कारण केरल के कई निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। जहां एक ओर UNA अपनी ₹40,000 की मांग पर अडिग है, वहीं निजी अस्पताल प्रबंधन लगातार कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं। इस ताजा आदेश ने अब इस संघर्ष को फिर से प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच के कानूनी दायरे में ला खड़ा किया है।

