केरल हाईकोर्ट ने पेरियार नदी में प्रदूषण रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें काम पूरा करने के लिए अगले साल अगस्त तक का समय मांगा गया था। चीफ जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस श्याम कुमार वी. एम. की खंडपीठ ने आदेश दिया है कि इस प्लांट का पूरा काम इसी साल यानी 31 दिसंबर 2026 तक हर हाल में पूरा किया जाए।
हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की समय-सीमा ठुकराई
यह फैसला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य पर्यावरण इंजीनियर द्वारा 14 जुलाई 2026 को पेश की गई रिपोर्ट के बाद आया है। इस रिपोर्ट में एसटीपी का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए अगस्त 2027 तक का समय प्रस्तावित किया गया था। हाईकोर्ट की बेंच ने इस समय-सीमा को पूरी तरह नामंजूर करते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी और विभाग इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नदी के पर्यावरण, जीव-जंतुओं और वनस्पतियों को बचाने की दिशा में जारी पिछले अदालती निर्देशों को अधिकारियों ने उचित प्राथमिकता नहीं दी है।
जनवरी 2027 में पेश करनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में तय की गई है। हाईकोर्ट ने मुख्य पर्यावरण इंजीनियर को कड़ा निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई पर कोर्ट में एक औपचारिक अनुपालन रिपोर्ट (कंप्लायंस रिपोर्ट) पेश करें, जिसमें प्लांट का निर्माण कार्य पूरी तरह पूरा होने की पुष्टि की गई हो। इससे पहले, जून में भी हाईकोर्ट ने बोर्ड को इस काम के लिए एक संशोधित समय-सारिणी बनाने और उसका कड़ाई से पालन करने को कहा था। तब कोर्ट ने रेखांकित किया था कि नदी की जैव-विविधता और स्थानीय पर्यावरण के संरक्षण के लिए यह ट्रीटमेंट सिस्टम बेहद जरूरी है।
औद्योगिक कचरे और बाजार की गंदगी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
यह अदालती कार्रवाई पेरियार नदी में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए दायर की गई विभिन्न याचिकाओं पर चल रही है। इन याचिकाओं में मुख्य रूप से नदी के किनारे मौजूद उद्योगों से निकलने वाले रासायनिक कचरे और अलुवा बाजार की गंदगी को सीधे पानी में बहाए जाने पर रोक लगाने की मांग की गई है। इसी के समाधान के रूप में इस सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जा रहा है।

