केरल हाईकोर्ट ने नीट यूजी 2026 (NEET-UG) के नतीजों की घोषणा से पहले फाइनल आंसर-की को चुनौती देने की अनुमति मांगने वाली एक परीक्षार्थी की याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई अंतिम उत्तर कुंजी की समीक्षा करना या उस पर अपीलीय अदालत की तरह सुनवाई करना संवैधानिक अदालतों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
विशेषज्ञों के फैसले पर न्यायिक हस्तक्षेप की गुंजाइश सीमित
16 जुलाई 2026 को जारी अपने आदेश में जस्टिस मुरली कृष्ण एस ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत मिली असाधारण शक्तियों का प्रयोग करके हाईकोर्ट विषय विशेषज्ञों के निर्णयों पर अपीलीय प्राधिकारी की तरह काम नहीं कर सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि जब तक उत्तर कुंजी की समीक्षा करने वाले विशेषज्ञों के खिलाफ दुर्भावना का कोई आरोप न हो, तब तक ऐसे शैक्षणिक मामलों में अदालती हस्तक्षेप की गुंजाइश बहुत सीमित होती है।
हाईकोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा 25 जून 2026 को जारी उस सार्वजनिक नोटिस का भी जिक्र किया, जिसमें साफ कहा गया था कि अंतिम उत्तर कुंजी प्रकाशित होने के बाद किसी भी तरह का ऐतराज स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत के अनुसार, परीक्षा का आयोजन और मूल्यांकन पूरी तरह से शैक्षणिक दायरा है, इसलिए एनटीए को परिणाम से पहले आपत्ति दर्ज कराने की कोई नई समय-सीमा देने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।
क्या था छात्रा का मामला?
यह विवाद 21 जून 2026 को आयोजित नीट यूजी की पुनः परीक्षा में शामिल हुई एक 19 वर्षीय परीक्षार्थी की याचिका से शुरू हुआ था। छात्रा ने 28 जून 2026 को ईमेल भेजकर अपनी टेस्ट बुकलेट के छह सवालों पर सहायक दस्तावेजों के साथ आपत्ति दर्ज कराई थी। मांग पूरी न होने पर उसने अदालत का रुख किया।
याचिका में मांग की गई थी कि उसकी आपत्तियों को उत्तर कुंजी अंतिम रूप दिए जाने से पहले विशेषज्ञों की समिति के सामने रखा जाए। इसके अलावा, छात्रा ने परिणाम घोषित होने से कम से कम तीन दिन पहले अंतिम उत्तर कुंजी सार्वजनिक करने और उसके ऑनलाइन सत्र से जुड़ी सर्वर लॉग फाइलों को सुरक्षित रखने के निर्देश देने का अनुरोध किया था।
एकल पीठ के फैसले को दी गई थी चुनौती
इससे पहले 7 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि अदालतें शैक्षणिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। इस फैसले के खिलाफ छात्रा ने अपील दायर की। छात्रा के वकील ने तर्क दिया कि एकल पीठ ने अंतिम उत्तर कुंजी पर छात्रों को चुनौती का अवसर न देकर राहत देने में चूक की है।
एनटीए की ओर से उपस्थित वरिष्ठ वकील निर्मल एस ने अपील का विरोध करते हुए कहा कि उत्तर कुंजी विशेषज्ञों की गहन जांच के बाद ही अंतिम रूप लेती है, इसलिए इसमें अदालत के दखल का कोई आधार नहीं है। हाईकोर्ट ने एनटीए के तर्कों से सहमति जताते हुए अपील को आधारहीन पाया और इसे खारिज कर दिया।

