केरल हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर कथित आपत्तिजनक वीडियो डालने के मामले में यूट्यूब संपादक को अग्रिम जमानत दी

केरल हाईकोर्ट ने एक यूट्यूब चैनल के मुख्य संपादक टी. पी. नंदकुमार को अग्रिम जमानत दे दी है। उनके खिलाफ एक वीडियो पोस्ट करने को लेकर मामला दर्ज किया गया था, जिसमें मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को लेकर कथित रूप से यौन रूप से आपत्तिजनक सामग्री होने का आरोप था।

न्यायमूर्ति कौसर एदप्पगथ ने नंदकुमार की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई भी मामला नहीं बनता जिससे यह माना जा सके कि उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67A का उल्लंघन किया है, जो इलेक्ट्रॉनिक रूप में यौन रूप से स्पष्ट सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण से संबंधित है।

प्रकरण उस वीडियो से जुड़ा है जो नंदकुमार के यूट्यूब चैनल पर प्रकाशित हुआ था। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि यह वीडियो मुख्यमंत्री की छवि खराब करने और जनविरोध भड़काने के उद्देश्य से बनाया गया था तथा उसमें यौन रूप से आपत्तिजनक सामग्री थी।

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नंदकुमार ने अपनी याचिका में कहा कि वीडियो में कोई अश्लीलता नहीं है और यह केवल एक राजनीतिक टिप्पणी है। उन्होंने दावा किया कि यह वीडियो एक युवा विधायक द्वारा एक महिला के साथ कथित छेड़छाड़ के आरोपों की पृष्ठभूमि में था और इसमें मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा अपनाए गए दोहरे मानकों की तुलना की गई थी, जब ऐसे ही आरोप उनके दल के नेताओं पर लगे थे।

अदालत ने अभियोजन पक्ष के इस तर्क को खारिज कर दिया कि वीडियो यौन रूप से स्पष्ट है और जनता को भ्रष्ट करने या भड़काने वाला है। कोर्ट ने कहा:

“किसी भी दृष्टिकोण से इस वीडियो को यौन रूप से स्पष्ट नहीं कहा जा सकता और न ही यह कहा जा सकता है कि इसकी सामग्री देखने वालों के मन को भ्रष्ट या प्रभावित कर सकती है।”

कोर्ट ने आगे कहा:

“सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67A के तहत यौन रूप से स्पष्ट कृत्य या आचरण वाली सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण का कोई भी प्रथम दृष्टया मामला आवेदक (नंदकुमार) के खिलाफ नहीं बनता।”

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कथित वीडियो से संबंधित हार्ड डिस्क पहले ही पुलिस द्वारा जब्त की जा चुकी है और जांच लगभग पूरी हो चुकी है, ऐसे में आरोपी की हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है।

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कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि नंदकुमार को गिरफ्तार किया जाता है तो उन्हें ₹1 लाख के निजी मुचलके और दो समतुल्य सक्षम जमानतदारों के साथ रिहा किया जाए। साथ ही, उन्हें निम्नलिखित शर्तों का पालन करना होगा:

  • जांच में पूरा सहयोग देना होगा और आवश्यक होने पर “काल्पनिक पुलिस कस्टडी” के लिए भी उपलब्ध रहना होगा।
  • हर शनिवार सुबह 10 बजे से 11 बजे के बीच जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना होगा, जब तक कि आगे कोई आदेश न दिया जाए।
  • किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे और न ही साक्ष्य से छेड़छाड़ करेंगे।
  • ट्रायल कोर्ट की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे।
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इस आदेश के साथ अदालत ने आरोपी को अंतरिम राहत दी, वहीं जांच की प्रक्रिया को भी बिना किसी बाधा के आगे बढ़ाने की अनुमति दी।

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