सबरीमाला में शवों को स्ट्रेचर से ले जाने पर रोक; केरल हाईकोर्ट ने एम्बुलेंस अनिवार्य की

केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला यात्रा के दौरान निधन होने वाले श्रद्धालुओं के शवों को सन्निधानम से पम्बा तक स्ट्रेचर पर ले जाने की प्रथा पर कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने कहा कि उसे यह जानकर “आश्चर्य और निराशा” हुई कि इतनी तकलीफ़देह पद्धति आज भी जारी है, जबकि इससे शोकाकुल परिवारों और कठिन चढ़ाई पर चल रहे अन्य यात्रियों को भारी कष्ट होता है।

न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और न्यायमूर्ति के. वी. जयकुमार की पीठ ने निर्देश दिया कि यह प्रथा तुरंत बंद की जाए और शवों के परिवहन के लिए अनिवार्य रूप से एम्बुलेंस का उपयोग हो, ताकि हर चरण में “मृतक की गरिमा और सम्मान” सुनिश्चित किया जा सके।

यह आदेश तब आया जब सबरीमाला के विशेष आयुक्त ने अदालत को बताया कि कठिन चढ़ाई के दौरान—अधिकतर हृदयगति रुकने की घटनाओं में—मृत श्रद्धालुओं के शव अभी भी स्ट्रेचर से नीचे लाए जाते हैं, जिससे परिजनों और अन्य यात्रियों को “काफी मानसिक और शारीरिक असुविधा” होती है।

उन्होंने यह भी बताया कि पम्बा में एक पुरानी एम्बुलेंस खड़ी है, जिसका इस उद्देश्य के लिए उपयोग किया जा सकता है।

अदालत ने सिफारिश स्वीकार करते हुए त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) को निर्देश दिया कि जब तक नई और उपयुक्त एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होती, तब तक पम्बा में मौजूद पुरानी एम्बुलेंस का ही उपयोग किया जाए।

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पीठ ने स्पष्ट किया,
“यह व्यवस्था अगली सूचना तक या बेहतर वाहन उपलब्ध होने तक जारी रहेगी। एम्बुलेंस का उपयोग केवल इसी उद्देश्य के लिए किया जाएगा।”

अदालत ने बताया कि मंडलम–मकरविलक्कु सीज़न में हर साल लगभग 150 हृदय संबंधी घटनाएँ होती हैं, जिनमें से 40–42 मौतें होती हैं।

इस वर्ष सिर्फ पहले आठ दिनों में ही आठ श्रद्धालुओं की मृत्यु हृदयगति रुकने से हुई।

चिकित्सा विशेषज्ञों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि अचानक और तेज़ चढ़ाई से एंजाइना, मायोकार्डियल इंफार्क्शन या अचानक हृदय रुकने जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। नीलीमाला–अप्पाचिमेडु मार्ग को सबसे अधिक खतरनाक बताया गया है।

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अदालत ने श्रद्धालुओं को सलाह देने का निर्देश दिया कि वे इस खड़ी चढ़ाई वाले हिस्से में पर्याप्त विश्राम लें।

अदालत ने कहा कि अब एक व्यापक और व्यवस्थित प्रतिक्रिया की आवश्यकता है। TDB को सात दिनों के भीतर निम्न बिंदुओं को शामिल करते हुए एक विस्तृत प्रोटोकॉल तैयार करने का आदेश दिया गया:

  • श्रद्धालुओं के लिए स्पष्ट स्वास्थ्य सलाह
  • भीड़ प्रबंधन योजना
  • वर्चुअल क्यू सिस्टम के संचालन संबंधी निर्देश
  • प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची (प्लास्टिक, केमिकल कुमकुम, शैम्पू की छोटी पाउच आदि)
  • पर्यावरण निर्देश, विशेषकर पम्पा नदी में धोती या कपड़ा फेंकने पर रोक
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अदालत ने कहा कि नदी में कपड़े फेंकना कोई आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है और इससे पवित्र पम्पा नदी का पर्यावरण दूषित होता है।

अदालत ने निर्देश दिया कि तैयार प्रोटोकॉल को:

  • TDB की वेबसाइट पर अपलोड किया जाए
  • प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और दृश्य मीडिया में बहुभाषीय रूप से प्रसारित किया जाए
  • घोषणाओं, बैनरों और SMS संदेशों के माध्यम से प्रचारित किया जाए

पीठ ने साफ कहा कि यह पूरा कार्य एक सप्ताह के भीतर पूरा होना चाहिए।

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