अभिनेत्री हमला मामला: मुख्य आरोपी पल्सर सुनी को केरल हाईकोर्ट से झटका, सजा निलंबित करने और जमानत की याचिका खारिज

केरल हाईकोर्ट ने साल 2017 के बहुचर्चित अभिनेत्री अपहरण और यौन उत्पीड़न मामले के मुख्य आरोपी सुनील एन एस उर्फ पल्सर सुनी को कोई भी अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की खंडपीठ ने पल्सर सुनी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपनी अपील लंबित रहने के दौरान 20 साल की जेल की सजा को निलंबित करने और जमानत पर रिहा करने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपराध की अत्यधिक गंभीरता, याचिकाकर्ता की लंबी आपराधिक पृष्ठभूमि और पहले भी जमानत की शर्तों का उल्लंघन किए जाने के कारण उसे ऐसी कोई राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सिर्फ लंबे समय तक हिरासत में रहने को ही दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 389 के तहत सजा स्थगित करने का एकमात्र आधार नहीं माना जा सकता।

खंडपीठ ने इस अपराध को बेहद घिनौना और पहले से सुनियोजित साजिश करार दिया। जजों ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह घटना असाधारण आपराधिक क्रूरता को दर्शाती है और इसे अंजाम देने का तरीका बिल्कुल अभूतपूर्व था। अदालत ने रेखांकित किया कि इस तरह के अपराध का दायरा सिर्फ एक पीड़िता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह सीधे तौर पर महिलाओं की गरिमा, उनके आत्मसम्मान, शारीरिक स्वायत्तता और सुरक्षा की भावना पर आघात करता है। इससे कानून के शासन और हमारी न्याय प्रणाली पर आम जनता का भरोसा भी कमजोर होता है।

ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई कानूनी खामी नहीं

पल्सर सुनी ने अपनी अर्जी में दलील दी थी कि वह इस मामले में लगभग आठ साल की सजा काट चुका है। उसने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 389 के तहत राहत की मांग की थी, जो अपीलीय अदालत को अपील लंबित रहने के दौरान सजा को अस्थायी रूप से निलंबित करने और जमानत देने का अधिकार देती है।

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हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता निचली अदालत (सेशंस कोर्ट) के मूल फैसले में कोई भी स्पष्ट अवैधता, गंभीर विसंगति या कानूनी त्रुटि दिखाने में पूरी तरह नाकाम रहा है। अदालत ने कहा कि इस मध्यवर्ती चरण में ऐसा कोई ठोस कारण नजर नहीं आता जिसके आधार पर सेशंस जज के निष्कर्षों को अनुचित माना जाए और सजा पर रोक लगाई जाए।

हाईकोर्ट ने आरोपी के आपराधिक इतिहास को भी ध्यान में रखा, जिसके तहत वह 11 अन्य गंभीर मामलों में शामिल रहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि उसने पहले भी जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया था, जब इस मामले की सुनवाई के दौरान जमानत पर बाहर रहते हुए उस पर एक और अपराध करने का आरोप लगा था।

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क्या है पूरा मामला

यह पूरा मामला 17 फरवरी 2017 का है, जब त्रिशूर से कोच्चि जा रही एक मशहूर बहुभाषी अभिनेत्री का चलती गाड़ी में अपहरण कर लिया गया था और उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया था।

पिछले साल 12 दिसंबर को एक सेशंस कोर्ट ने इस मामले में सामूहिक दुष्कर्म के अपराध के लिए मुख्य आरोपी सुनील समेत छह लोगों को दोषी करार देते हुए 20 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। इसी फैसले में कोर्ट ने अभिनेता दिलीप और तीन अन्य सह-आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था।

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