विवादित बयान मामला: भाजपा नेता सी टी रवि को कर्नाटक हाईकोर्ट से राहत, पुलिस कार्रवाई पर रोक

नीट (NEET) पेपर लीक के विरोध में आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान कथित भड़काऊ टिप्पणी मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एमएलसी सी टी रवि को कर्नाटक हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में भाजपा नेता के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न करें।

जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने सी टी रवि की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम निर्देश जारी किया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) को रद्द करने की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार के लिए तय की गई है।

एफआईआर और कानूनी मामला

यह मामला चिकमगलूरु के आजाद पार्क सर्किल में बीते गुरुवार की शाम भाजपा जिला इकाई द्वारा आयोजित प्रदर्शन से जुड़ा है। इस दौरान दिए गए भाषण को लेकर शनिवार को चिकमगलूरु टाउन पुलिस स्टेशन में सी टी रवि के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

यह एफआईआर स्थानीय जामिया कमेटी के अध्यक्ष मुदस्सिर पाशा की शिकायत के आधार पर दर्ज हुई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 353(2) के तहत मामला दर्ज किया है। यह प्रावधान विभिन्न धार्मिक, भाषाई, जातीय या सामुदायिक समूहों के बीच वैमनस्य, नफरत या शत्रुता को बढ़ावा देने वाले झूठे बयान, अफवाहें या रिपोर्ट फैलाने के कृत्य को दंडनीय बनाता है।

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आवास पर नोटिस देने पर हंगामा

रविवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस टीम सी टी रवि को पूछताछ में शामिल होने का औपचारिक नोटिस देने चिकमगलूरु स्थित उनके आवास पर पहुंची। नोटिस की तामील को लेकर पुलिस अधिकारियों, एमएलसी और उनके समर्थकों के बीच तीखी बहस हुई।

जब सी टी रवि ने नोटिस स्वीकार करने से इनकार कर दिया, तो पुलिस अधिकारियों ने उसकी एक प्रति मुख्य द्वार के पास दीवार पर चिपका दी। पुलिस के जाने के तुरंत बाद समर्थकों ने दीवार से नोटिस हटा दिया और राज्य सरकार तथा पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए घर के बाहर प्रदर्शन किया।

सी टी रवि का पलटवार और सफाई

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दूसरी ओर, सोमवार को कोप्पल में पत्रकारों से बातचीत में और रविवार को सोशल मीडिया पर जारी एक संदेश में सी टी रवि ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी भी समुदाय के खिलाफ असंसदीय भाषा या अभद्र टिप्पणी का इस्तेमाल नहीं किया है।

अपनी टिप्पणी पर सफाई देते हुए भाजपा एमएलसी ने कहा कि उन्होंने दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान एक जीप के फ्यूल टैंक में आग लगाने की कोशिश करने वाले एक मौलवी (मुल्ला) के कृत्य की निंदा की थी। उन्होंने तर्क दिया कि किसी एक व्यक्ति के गलत काम की आलोचना करने का अर्थ पूरे समुदाय का अपमान करना नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं और वर्दी का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं के कारण उन्होंने पुलिस को दो दिन बाद खुद थाने आने की जानकारी दे दी थी, फिर भी पुलिस उनके आवास पर पहुंची।

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