मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस द्वारकाधीश बंसल इन दिनों अपने किसी फैसले नहीं, बल्कि अदालत पहुंचने के अपने अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वैश्विक ऊर्जा संकट के मद्देनजर ईंधन बचाने की अपील से प्रेरित होकर, जस्टिस बंसल ने अपने दैनिक सफर के लिए कार छोड़कर साइकिल को अपनाया है।
हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में जस्टिस बंसल को साइकिल से हाईकोर्ट जाते देखा गया। उन्होंने बताया कि यह कदम पूरी तरह से प्रधानमंत्री के उस संदेश पर आधारित है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से पर्यावरण संरक्षण और ईंधन की बचत के लिए योगदान देने का आह्वान किया था।
“खुद उदाहरण बनना जरूरी”
जस्टिस बंसल का मानना है कि समाज में बदलाव लाने के लिए खुद पहल करना आवश्यक है। उन्होंने आम जनता, विशेषकर कम दूरी (1 से 2 किलोमीटर) तय करने वाले लोगों से अपील की कि वे अपने छोटे-मोटे कामों के लिए साइकिल का उपयोग करें। उनके अनुसार, जीवनशैली में किए गए ये छोटे बदलाव ही भविष्य में पर्यावरण स्थिरता और बड़े पैमाने पर ईंधन की बचत की नींव रखेंगे।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि न्यायपालिका के किसी उच्च पद पर होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति समाज के प्रति अपनी बुनियादी जिम्मेदारियों और टिकाऊ आदतों से ऊपर हो गया है।
स्वास्थ्य और न्यायिक तालमेल
पर्यावरण के साथ-साथ जस्टिस बंसल ने इस आदत के स्वास्थ्य लाभों पर भी जोर दिया। उन्होंने साझा किया कि वे अक्सर मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) संजीव सचदेवा के साथ भी जबलपुर की सड़कों पर साइकिल चलाते हैं। उनके अनुसार, साइकिल चलाना न केवल व्यावहारिक है, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।
पारंपरिक जीवनशैली की ओर वापसी
पुराने दिनों को याद करते हुए जस्टिस बंसल ने कहा कि एक समय था जब साइकिल परिवहन का मुख्य साधन हुआ करती थी। उन्होंने आज के नागरिकों को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें मौसम या छोटी-मोटी असुविधाओं का बहाना बनाकर आधुनिकता के पीछे नहीं भागना चाहिए, बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटकर पर्यावरण के अनुकूल जीवन जीना चाहिए।
जस्टिस बंसल की यह सादगी और पर्यावरण के प्रति उनकी जागरूकता सोशल मीडिया पर खूब वाहवाही बटोर रही है।

