सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी: हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मी के खिलाफ रद्द नहीं की एफआईआर, समझौते की याचिका खारिज

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फर्जी नियुक्ति पत्र देकर धोखाधड़ी करने के आरोपी पटियाला पुलिस के एक सीनियर कांस्टेबल के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी लोक सेवक पर लगे पद के दुरुपयोग और फर्जी दस्तावेज तैयार करने जैसे गंभीर आरोपों को केवल निजी समझौते के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता।

समझौते की अर्जी खारिज करते हुए कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल ने 11 अगस्त को दिए अपने आदेश में कहा कि आरोपी एक सार्वजनिक सेवक है और उस पर नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करने का गंभीर आरोप है। ऐसे मामले में अदालत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल कर एफआईआर रद्द नहीं कर सकती।

अदालत ने कहा कि यह मामला दीवानी, व्यावसायिक या पारिवारिक विवादों जैसा नहीं है, जहां पक्षों के बीच आपसी सहमति से मामला सुलझाया जा सके। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि सरकारी नौकरी का झांसा देने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने जैसे अपराधों का पूरे समाज और जनविश्वास पर गहरा असर पड़ता है। यदि मुकदमे की सुनवाई के दौरान ये आरोप साबित होते हैं, तो इसके गंभीर कानूनी परिणाम होंगे।

3 लाख रुपये में सरकारी नौकरी का दिया था झांसा

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यह आपराधिक मामला एक निजी स्कूल में कार्यरत कंप्यूटर टीचर की शिकायत से जुड़ा है। पीड़ित के मुताबिक, उसके मामा एक कारपेंटर हैं, जिन्होंने आरोपी पुलिसकर्मी के घर पर काम किया था। इसी दौरान संपर्क में आए पुलिसकर्मी ने पीड़ित को सरकारी नौकरी दिलाने का वादा किया और इसके बदले 3 लाख रुपये की मांग की।

सौदा तय होने पर पीड़ित ने 1.5 लाख रुपये की एडवांस राशि दो किस्तों में दी, जिसकी दूसरी किस्त दिसंबर 2022 में चुकाई गई थी। इसके बाद आरोपी ने पीड़ित को चंडीगढ़ के सेक्टर 43 स्थित बस स्टैंड पर बुलाया, जहां एक व्यक्ति (जिसे पूर्व सरपंच बताया गया) ने उसे नियुक्ति पत्र सौंपा।

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दिल्ली में पते पर निकला पार्किंग लॉट

नियुक्ति पत्र की जांच करने पर पीड़ित ने पाया कि उसमें नारकोटिक सेल की जगह ‘नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एफओडी), दिल्ली’ का जिक्र था और उसमें नामों की स्पेलिंग भी गलत थी। जब पीड़ित पदभार ग्रहण करने के लिए दिल्ली पहुंचा—जहां आरोपी पुलिसकर्मी भी उसके साथ गया था—तो दिए गए पते पर कार्यालय के बजाय एक पार्किंग लॉट मिला।

ठगी का अहसास होने पर जब पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगे, तो पुलिसकर्मी ने रकम लौटाने से मना कर दिया। पीड़ित ने आरोप लगाया कि उक्त पुलिसकर्मी पहले भी कई लोगों के साथ इसी तरह की ठगी कर चुका है। हालांकि, इस साल मई में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हो गया था, जिसके आधार पर आरोपी ने एफआईआर रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था।

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