पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को शिरोमणि अकाली दल के कार्यकर्ता जोबनप्रीत सिंह को तुरंत हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह फैसला जोबनप्रीत के पिता मुखवंत सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया, जिसमें उन्होंने अपने बेटे की गिरफ्तारी को पूरी तरह गैर-कानूनी और असंवैधानिक बताया था।
जस्टिस आलोक जैन की अदालत ने इस मामले पर सुनवाई की। रिहाई के आदेश के साथ-साथ याचिकाकर्ता ने कोर्ट से जोबनप्रीत की गिरफ्तारी से जुड़े तमाम पुख्ता सबूतों, जैसे सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग को भी सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की।
अदालत में जोबनप्रीत के वकील दमनबीर सिंह सोबती ने दलील दी कि मजीठा के रहने वाले जोबनप्रीत को पुलिस ने 31 मई को हिरासत में लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के समय पुलिस ने जोबनप्रीत को हिरासत में लेने का कोई लिखित कारण नहीं बताया। सोबती ने कोर्ट को बताया कि यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 22(1) और इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा समय-समय पर दिए गए दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। बचाव पक्ष ने यह भी साफ किया कि पुलिस ने गिरफ्तारी से पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35 के तहत कोई जरूरी नोटिस भी जारी नहीं किया था।
शिरोमणि अकाली दल का आरोप है कि जोबनप्रीत को राजनीतिक रंजिश के तहत झूठे मामले में फंसाया गया है। जोबनप्रीत हाल ही में हुए चुनाव में पार्टी के पोलिंग एजेंट के रूप में काम कर रहे थे। अकाली दल ने पहले दावा किया था कि पुलिस जोबनप्रीत को उनके घर से उठाकर ले गई थी और उन्हें सामान्य पुलिस लॉकअप में बंद करने के बजाय सीधे थाना प्रभारी (SHO) के निजी आवास में रखा गया था।
इस गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मामले ने बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने रविवार को वरिष्ठ अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और उनके करीब 50 से 60 समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि मजीठिया और उनके साथियों ने कानून को ताक पर रखकर थाने पर धावा बोला, अधिकारियों के कमरों में जबरन घुसे, जोबनप्रीत को छुड़ाने की कोशिश की और सरकारी फाइलों को नुकसान पहुंचाया। इस घटना के बाद से पुलिस बिक्रम सिंह मजीठिया की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

