ठाणे स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने वर्ष 2022 में एक बस की टक्कर से मारे गए 62 वर्षीय स्कूटर चालक के परिवार को 18.61 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अधिकरण ने महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) को यह राशि दुर्घटना में मृत रमेश घाग की पत्नी और उनके दो बच्चों को भुगतान करने का निर्देश दिया है। ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह दुर्घटना पूरी तरह से राज्य परिवहन बस के चालक की लापरवाही और तेज ड्राइविंग के कारण हुई थी।
मुआवजे की राशि और भुगतान की शर्तें
एमएसीटी के सदस्य आर. वी. मोहिते द्वारा 18 जुलाई को पारित इस आदेश की प्रति सोमवार को उपलब्ध हुई। अधिकरण ने एमएसआरटीसी को 18,61,972 रुपये की राशि दावा याचिका दायर करने की तिथि से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ एक महीने के भीतर जमा कराने का निर्देश दिया है। इस मामले में याचिकाकर्ताओं का पक्ष अधिवक्ता एस. एल. माने और एमएसआरटीसी का पक्ष अधिवक्ता एच. पी. पाटिल ने रखा।
यह सड़क हादसा 26 नवंबर 2022 को मुरबाड में किन्हावली-टिटवाला मार्ग पर हुआ था, जब एक एसटी बस ने रमेश घाग के स्कूटर को टक्कर मार दी थी। हादसे में गंभीर रूप से घायल घाग को मुरबाड, डोंबिवली और मुंबई के विभिन्न अस्पतालों में इलाज के लिए ले जाया गया, जहां 10 दिसंबर 2022 को उन्होंने दम तोड़ दिया।
एमएसआरटीसी के तर्कों को ट्रिब्यूनल ने खारिज किया
सुनवाई के दौरान एमएसआरटीसी ने अपनी जिम्मेदारी से इनकार करते हुए दावा किया था कि घाग ने गलत दिशा से दूसरे वाहन को ओवरटेक करने का प्रयास किया था और वे स्वयं भी दुर्घटना के लिए समान रूप से जिम्मेदार थे।
ट्रिब्यूनल ने परिवहन निगम की इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया। अधिकरण ने रेखांकित किया कि पुलिस ने बस चालक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन न तो चालक ने और न ही निगम ने एफआईआर या अभियोजन को कानूनी चुनौती दी। इसके अलावा, एमएसआरटीसी सुनवाई के दौरान बस में सवार किसी यात्री या अन्य स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी को गवाह के तौर पर पेश करने में असफल रहा।
अधिकरण ने टिप्पणी की कि बस चालक के पास दुर्घटना को टालने का अंतिम अवसर उपलब्ध था। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है जो मृतक की ओर से किसी भी तरह की लापरवाही को दर्शाता हो।
आय का आकलन और अंतिम निर्णय
मुआवजे की गणना करते समय ट्रिब्यूनल ने मृतक की काल्पनिक मासिक आय 16,000 रुपये तय की। याचिकाकर्ता परिवार ने दावा किया था कि घाग बढ़ई और व्यवसायी के रूप में प्रति माह 40,000 रुपये कमाते थे, लेकिन आवश्यक दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत न किए जा सकने के कारण अधिकरण ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया।

