तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को नफरती भाषण (हेट स्पीच) से जुड़े एक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने पुलिस को आगामी 5 अक्टूबर तक उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि यह सुरक्षा जांच में उनके पूर्ण सहयोग पर ही लागू रहेगी।
जांच में शामिल होने का आदेश और अगली सुनवाई
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा को 14 अगस्त को जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है। पीठ ने टिप्पणी की कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की जिन धाराओं के तहत यह मामला दर्ज हुआ है, उनमें सात वर्ष से कम कारावास का प्रावधान है। स्थापित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, यदि याचिकाकर्ता जांच में सहयोग करती हैं तो वे गिरफ्तारी या कठोर कार्रवाई से राहत पाने की हकदार हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को होगी।
संसद सत्र और पूछताछ की समय-सीमा
महुआ मोइत्रा के वकील अयान भट्टाचार्य ने अदालत में तर्क दिया कि उनकी मुवक्किल फिलहाल दिल्ली में हैं और 13 अगस्त तक चलने वाले संसद के मानसून सत्र में भाग ले रही हैं। उन्होंने निवेदन किया कि आवश्यकता पड़ने पर 13 अगस्त तक पुलिस उनसे वर्चुअली पूछताछ कर सकती है, जिसके बाद 14 अगस्त से वह व्यक्तिगत रूप से जांच अधिकारी के सामने पेश होंगी। मोइत्रा ने नदिया जिले के होगोलबेरिया थाने में दर्ज इस प्राथमिकी को मनगढ़ंत बताते हुए मामला रद्द करने की याचिका लगाई थी।
राज्य सरकार का विरोध और सुरक्षा के कड़े निर्देश
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से पेश हुए एडवोकेट जनरल सुरोजीत नाथ मित्रा ने इस राहत याचिका का विरोध किया। उन्होंने पीठ को अवगत कराया कि सांसद इससे पहले पुलिस द्वारा भेजे गए चार समन पर उपस्थित नहीं हुई थीं। वहीं, सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा के कानूनी दल ने सुरक्षा संबंधी आशंकाएं जाहिर कीं, जिस पर संज्ञान लेते हुए जस्टिस भट्टाचार्य ने पुलिस को निर्देश दिया कि सांसद की पेशी के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था रखी जाए ताकि उन्हें किसी सार्वजनिक विरोध या अंडे फेंके जाने जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

