बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TCP) बोर्ड को एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) और ऊंचाई में छूट से संबंधित सभी मौजूदा और भविष्य के आवेदनों पर स्पष्ट रूप से यह अंकित किया जाए कि वे एक जारी कानूनी चुनौती के अंतिम परिणाम के अधीन होंगे।
जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित एस. जमसांडेकर की खंडपीठ ने यह निर्देश ‘गोवा फाउंडेशन’ नामक एनजीओ द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान दिया। इस याचिका में गोवा भूमि विकास और भवन निर्माण नियमावली, 2010 के संशोधित नियम 6.1.1 को चुनौती दी गई है, जिसके माध्यम से अगस्त 2023 में निर्माण घनत्व बढ़ाने की अनुमति दी गई थी।
हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया कि वर्तमान में बोर्ड के पास बढ़े हुए FAR के लिए लगभग 255 आवेदन लंबित हैं। पारदर्शिता बनाए रखने और भविष्य की कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए, पीठ ने TCP बोर्ड को निर्देश दिया कि वे हर उस आवेदक को—चाहे वह पुराना हो या नया—इस लंबित याचिका के बारे में सूचित करें।
यदि बोर्ड मामले की सुनवाई के दौरान अनुमति देता है, तो अदालत ने निम्नलिखित शर्तें रखी हैं:
- प्रत्येक अनुमति आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए कि यह जनहित याचिका के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।
- संशोधित नियम के तहत दी गई प्रत्येक मंजूरी के साथ हाईकोर्ट के इस आदेश की एक प्रति संलग्न की जानी चाहिए।
- आवेदक इन अनुमतियों के आधार पर किसी भी ‘इक्विटी’ या कानूनी सुरक्षा का दावा नहीं कर पाएंगे, क्योंकि जिस प्रावधान के तहत अनुमति दी जा रही है, उसकी वैधता खुद अदालत के विचाराधीन है।
हालांकि हाईकोर्ट ने ये सख्त निर्देश जारी किए, लेकिन उसने गोवा फाउंडेशन द्वारा मांगी गई तत्काल रोक (stay) लगाने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने बढ़े हुए FAR और ऊंचाई के आधार पर होने वाले सभी नए निर्माणों, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और पूर्णता प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने की मांग की थी। उनका तर्क था कि 2023 का संशोधन मूल कानून की शक्तियों से बाहर (ultra vires) है।
NGO ने अदालत से आग्रह किया कि क्षेत्रीय योजना (Regional Plan) या आउटलाइन डेवलपमेंट प्लान में निर्धारित सीमाओं से अधिक किसी भी निर्माण की अनुमति न दी जाए। हालांकि, बेंच ने कहा कि इस स्तर पर ऐसी रोक लगाने का मतलब कानून को निलंबित करना होगा, जबकि अभी प्रभावित पक्षों को सुना जाना बाकी है। अदालत ने टिप्पणी की कि इस स्तर पर ऐसी अंतरिम राहत देना प्रभावी रूप से अंतिम फैसला सुनाने जैसा होगा।
गोवा के शहरी नियोजन में FAR एक महत्वपूर्ण पैमाना है, जो भूखंड के आकार के सापेक्ष अधिकतम निर्माण क्षेत्र निर्धारित करता है। अगस्त 2023 के संशोधन ने इन प्रतिबंधों में काफी ढील दी थी, जिससे पर्यावरणविदों और नागरिक समूहों ने निर्माण घनत्व बढ़ने और मौजूदा भूमि-उपयोग योजनाओं के उल्लंघन की चिंता जताई थी।
हाईकोर्ट ने अब इस मामले की अंतिम सुनवाई 15 जून को तय की है, जिसमें राज्य के इन संशोधित निर्माण नियमों की दीर्घकालिक वैधता पर फैसला होगा।

