दिल्ली हाई कोर्ट ने बीना मोदी और ललित भसीन के खिलाफ ट्रायल पर लगाई रोक, कथित मारपीट मामले में नोटिस जारी

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को उद्योगपति बीना मोदी और वरिष्ठ अधिवक्ता ललित भसीन के खिलाफ चल रही निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी। यह मामला गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के कार्यकारी निदेशक समीर मोदी के साथ 2024 में एक बोर्ड मीटिंग के दौरान कथित मारपीट से जुड़ा है।

न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने बीना मोदी और ललित भसीन द्वारा दायर याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए दिल्ली पुलिस को चार सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी और तब तक निचली अदालत में लंबित कार्यवाही स्थगित रहेगी।

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, 30 मई 2024 को समीर मोदी गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के कार्यालय में बोर्ड बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। आरोप है कि बीना मोदी के निजी सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र प्रसाद ने उन्हें बोर्डरूम में प्रवेश करने से रोका और जब उन्होंने बैठक में शामिल होने पर जोर दिया तो उनके साथ मारपीट की।

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शिकायत के अनुसार, इस घटना में समीर मोदी की दाहिनी तर्जनी उंगली में फ्रैक्चर हो गया, जिसके लिए सर्जरी करानी पड़ी और उसमें स्क्रू तथा वायर डाला गया। मेडिकल-लीगल रिपोर्ट में इस चोट को गंभीर (grievous) बताया गया है। जांच के दौरान घटना से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज भी एकत्र किया गया।

समीर मोदी ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपनी मां बीना मोदी को घटना की जानकारी दी, तो उन्होंने उन्हें बैठकर मीटिंग जारी रखने को कहा। साथ ही, ललित भसीन ने भी कथित तौर पर बैठक को जारी रखने पर जोर दिया, भले ही वह घायल थे।

इस मामले में निचली अदालत ने 10 फरवरी को संज्ञान लेते हुए बीना मोदी, ललित भसीन और सुरेंद्र प्रसाद को समन जारी किए थे और उन्हें 7 मई को पेश होने का निर्देश दिया था।

हालांकि, 1 मार्च 2025 को दाखिल पुलिस चार्जशीट में सुरेंद्र प्रसाद के खिलाफ पर्याप्त प्रथमदृष्टया साक्ष्य पाए गए, लेकिन बीना मोदी और ललित भसीन के खिलाफ अभियोजन के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने की बात कही गई। इसके बावजूद समीर मोदी द्वारा दायर प्रोटेस्ट पिटीशन पर विचार करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उनके खिलाफ भी मामला चलाने की अनुमति दी।

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मजिस्ट्रेट ने कहा था कि परिस्थितियों के आधार पर साजिश या समान मंशा (common intention) का अनुमान लगाया जा सकता है और इस स्तर पर विस्तृत साक्ष्य परीक्षण आवश्यक नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि उपलब्ध सामग्री एक “meeting of minds” की ओर संकेत करती है, जो ट्रायल आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त है।

हाई कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने निचली अदालत के आदेश को “पूरी तरह त्रुटिपूर्ण” बताते हुए कहा कि यह इस गलत धारणा पर आधारित है कि जांच के दौरान पुलिस किसी को क्लीन चिट नहीं दे सकती। यह भी दलील दी गई कि सीसीटीवी फुटेज में मारपीट की कोई पुष्टि नहीं होती और समीर मोदी कथित घटना से पहले लगभग दो घंटे तक बैठक में मौजूद रहे थे।

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फिलहाल हाई कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद निचली अदालत में कार्यवाही रुकी रहेगी, जब तक कि मामले में आगे सुनवाई नहीं हो जाती और पुलिस अपनी रिपोर्ट दाखिल नहीं कर देती।

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