बड़गाईं जमीन मामला: सीएम हेमंत सोरेन को हाईकोर्ट से झटका, विशेष पीएमएलए अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार

झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के बड़गाईं इलाके में जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने शुक्रवार को सोरेन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने रांची स्थित विशेष पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) अदालत में अपने खिलाफ चल रही न्यायिक कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मुख्यमंत्री सोरेन ने विशेष अदालत द्वारा अपनी डिस्चार्ज अर्जी खारिज किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। यह पूरा मामला रांची के बड़गाईं अंचल में 8.86 एकड़ जमीन के कथित गैरकानूनी अधिग्रहण और हस्तांतरण को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से जुड़ा है।

निचली अदालत के आदेश को दी गई थी चुनौती

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हेमंत सोरेन ने आपराधिक दायित्व से मुक्त होने के लिए पहले ट्रायल कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, डिस्चार्ज अर्जी किसी आरोपी द्वारा औपचारिक आरोप तय होने से पहले आपराधिक केस को खत्म कराने के लिए अदालत के समक्ष की जाने वाली एक औपचारिक कानूनी प्रार्थना होती है। विशेष पीएमएलए अदालत ने 8 जून को सोरेन की यह अर्जी खारिज कर दी थी।

निचली अदालत के इस आदेश के खिलाफ सोरेन ने 31 अगस्त को हाईकोर्ट में अपील दायर की। सुनवाई के दौरान सोरेन के वकील ने हाईकोर्ट से आग्रह किया था कि जब तक इस अपील पर फैसला नहीं आ जाता, तब तक विशेष अदालत की कार्यवाही स्थगित रखी जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने 9 सितंबर को भी मामले में अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था और ईडी को विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे।

17 सह-आरोपियों पर पहले ही तय हो चुके हैं आरोप

एक तरफ जहां हेमंत सोरेन अपने खिलाफ अदालती कार्यवाही को रोकने के लिए कानूनी विकल्प अपना रहे हैं, वहीं विशेष अदालत में इस मामले के बाकी आरोपियों के खिलाफ प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।

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विशेष पीएमएलए कोर्ट इस मामले में सह-आरोपी अंतू तिर्की, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह और 15 अन्य लोगों समेत कुल 17 आरोपियों के खिलाफ पहले ही औपचारिक आरोप तय कर चुकी है।

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