ग्लोबल अय्यप्पा कॉन्क्लेव के खर्च पर केरल हाईकोर्ट सख्त, त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड से मांगा स्पष्टीकरण

केरल हाईकोर्ट ने ग्लोबल अय्यप्पा कॉन्क्लेव के आयोजन में हुए खर्च को लेकर त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) से जवाब तलब किया है। अदालत ने पाया कि कार्यक्रम पर हुआ खर्च प्रायोजकों से प्राप्त राशि से अधिक प्रतीत हो रहा है, जबकि बोर्ड ने पहले कहा था कि पूरा खर्च केवल स्पॉन्सरशिप से ही वहन किया जाएगा।

न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन और न्यायमूर्ति के. वी. जयकुमार की खंडपीठ ने गुरुवार को यह निर्देश जारी किए। अदालत ने कार्यक्रम से जुड़े ऑडिट रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद यह पाया कि कॉन्क्लेव के लिए किए गए खर्च और प्राप्त प्रायोजन राशि के बीच स्पष्ट असंगति दिखाई दे रही है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि कॉन्क्लेव का व्यय वास्तव में प्रायोजन राशि से अधिक हुआ है, तो त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड को यह स्पष्ट करना होगा कि अतिरिक्त वित्तीय दायित्व किन परिस्थितियों में लिए गए।

खंडपीठ ने यह भी टिप्पणी की कि उपलब्ध ऑडिट रिकॉर्ड से बोर्ड की वित्तीय अनुशासन व्यवस्था संतोषजनक नहीं लगती। अदालत के अनुसार कई मामलों में बिना वाउचर या रसीद के भुगतान किए जाने के संकेत मिले हैं और यह भी स्पष्ट नहीं है कि ऐसे खर्चों को किस आधार पर स्वीकृति दी गई।

अदालत ने कहा कि खर्चों को स्वीकृत करने के आधार और धन के उपयोग की निगरानी के लिए अपनाए गए उपायों का रिकॉर्ड पर्याप्त रूप से दर्ज नहीं किया गया है। न्यायालय ने इस स्थिति को गंभीर बताया, विशेषकर इसलिए क्योंकि यह संस्था मंदिर निधियों और श्रद्धालुओं के चढ़ावे के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालती है।

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पीठ ने यह भी कहा कि खर्च की मात्रा, विभिन्न स्रोतों से जुटाई गई धनराशि और बिना पारदर्शी लेखा प्रणाली के अग्रिम राशि जारी किए जाने के संकेत यह दर्शाते हैं कि वित्तीय प्रबंधन और आंतरिक नियंत्रण में गंभीर कमी है।

ये ऑडिट दस्तावेज अदालत के समक्ष 2 मार्च को दिए गए निर्देश के अनुपालन में प्रस्तुत किए गए थे। उसी दिन अदालत ने स्वतंत्र ऑडिटर विजयन एसोसिएट्स को मामले में पक्षकार बनाते हुए कॉन्क्लेव के खर्च से जुड़े सभी मूल दस्तावेज और रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया था।

गुरुवार को रिकॉर्ड प्रस्तुत किए जाने के बाद अदालत ने यह भी पाया कि विजयन एसोसिएट्स पिछले लगभग एक दशक से देवस्वोम बोर्ड के खातों का ऑडिट कर रहा है। इस पर अदालत ने ऑडिट फर्म को निर्देश दिया कि वह अपने पिछले ऑडिट के दौरान सामने आई सभी अनियमितताओं, कमियों और त्रुटियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करे।

इसके साथ ही अदालत ने ऑडिटर से यह भी बताने को कहा कि बोर्ड के वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही को बेहतर बनाने के लिए कौन-कौन से प्रक्रियात्मक या वित्तीय सुरक्षा उपाय आवश्यक हो सकते हैं, ताकि अदालत उचित निर्देश जारी कर सके।

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मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

यह कार्यवाही अदालत द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई है। दरअसल, पिछले वर्ष सितंबर में ग्लोबल अय्यप्पा कॉन्क्लेव के आयोजन को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते समय हाईकोर्ट ने कार्यक्रम से जुड़े खर्चों की ऑडिट रिपोर्ट मंगाने का निर्देश दिया था।

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