सबरीमाला मंदिर सोना चोरी मामला: केरल हाईकोर्ट का जांच जल्द पूरी करने का निर्देश, वैज्ञानिक विश्लेषण से खुले कई राज

केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला भगवान अयप्पा मंदिर से सोने की कथित चोरी की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) को निर्देश दिया है कि वह अपनी जांच को जल्द से जल्द पूरा कर अदालत में अंतिम रिपोर्ट दाखिल करे। जस्टिस राजा विजयाराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की खंडपीठ ने एसआईटी द्वारा सौंपी गई ताजा स्टेटस रिपोर्ट पर विचार करने के बाद यह निर्देश जारी किया।

यह मामला साल 2019 में मंदिर के गर्भगृह (श्रीकोविल) के दरवाजे के फ्रेम और द्वारपालक मूर्तियों की प्लेटों पर सोने की परत दोबारा चढ़ाने (री-प्लेटिंग) के काम के दौरान हुई सोने की कथित हेराफेरी से जुड़ा है।

गर्भगृह और द्वारपालक मामलों में जांच की प्रगति

एसआईटी ने हाईकोर्ट को सूचित किया कि गर्भगृह के दरवाजे के फ्रेम से जुड़े मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। जांच दल अगले 30 दिनों के भीतर इसकी अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने की स्थिति में होगा, जिसके बाद इस मामले में मुकदमा चलाने के लिए सक्षम प्राधिकारी से औपचारिक मंजूरी मांगी जाएगी।

वहीं, द्वारपालक मूर्तियों से जुड़े मामले का दायरा अब बढ़ गया है। जांच एजेंसी ने साल 2025 में मूर्तियों पर दोबारा परत चढ़ाने के काम के दौरान सोने की चोरी के नए आरोपों को भी इसी मामले के साथ जोड़ दिया है। इस नए घटनाक्रम के सिलसिले में अब तक 54 गवाहों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए जा चुके हैं। हालांकि एसआईटी ने इस मामले की अंतिम रिपोर्ट जल्द सौंपने की बात कही है, लेकिन जांच के कुछ गोपनीय पहलुओं को पूरा करने के लिए अदालत से थोड़ा अतिरिक्त समय मांगा है।

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वैज्ञानिक जांच से सुलझी सोने की चोरी की गुत्थी

इस पूरे मामले की सबसे खास बात यह है कि अभियोजन पक्ष केवल चश्मदीदों के बयानों या परिस्थितियों पर निर्भर नहीं है, बल्कि पूरा मामला वैज्ञानिक और फॉरेंसिक सबूतों पर आधारित है। आरोपियों द्वारा तांबे की प्लेटों से सोने की परत उतारने के तरीके का पता लगाने के लिए जांच टीम ने री-प्लेटिंग का ठेका लेने वाली कंपनी ‘स्मार्ट क्रिएशंस’ से एक खास केमिकल (स्ट्रिपिंग साल्ट) जब्त किया था। इस केमिकल को वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए जमशेदपुर स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला भेजा गया था।

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प्रयोगशाला में ‘एक्स-रे फ्लोरेसेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी’, ‘इंडक्टिवली कपल्ड प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमेट्री’ और ‘ऑप्टिकल एमिशन स्पेक्ट्रोस्कोपी’ जैसी बेहद आधुनिक तकनीकों के जरिए इस केमिकल का परीक्षण किया गया। इस वैज्ञानिक जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या इस केमिकल से तांबे की प्लेटों से सोना निकाला जा सकता है, चोरी किए गए सोने की सटीक मात्रा कितनी थी, और उन तांबे की प्लेटों की मूल संरचना व धातु के गुण क्या थे।

हाईकोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए कहा कि इस वैज्ञानिक विश्लेषण से आरोपियों के काम करने के तरीके (मोडस ऑपेरंडी) का पूरा खुलासा हो गया है। प्रयोगशाला की अंतिम रिपोर्ट में विस्तार से समझाया गया है कि सोने को तांबे से कैसे अलग किया गया, शुरुआत में चढ़ाई गई सोने की गुणवत्ता और मात्रा कितनी थी, और कंपनी द्वारा नैनो-गोल्ड प्लेटिंग के लिए कितने सोने का उपयोग किया गया था। इस वैज्ञानिक रिपोर्ट से जांच टीम को साल 2025 के कथित लेन-देन को समझने में भी बड़ी मदद मिली है।

हाईकोर्ट ने की राष्ट्रीय संस्थान की सराहना

खंडपीठ ने जांच में जमशेदपुर स्थित राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला के योगदान की सराहना की। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह संस्थान देश की एकमात्र ऐसी प्रयोगशाला है जिसके पास इस तरह के जटिल धातुकर्म विश्लेषण के लिए जरूरी तकनीकी विशेषज्ञता और आधुनिक बुनियादी ढांचा मौजूद है। संस्थान की ओर से मिले त्वरित सहयोग ने जांच की प्रगति को बेहद आसान और मजबूत बना दिया है।

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इस वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर मामले को आगे बढ़ाने के लिए एसआईटी के अधिकारियों ने 9 से 11 जुलाई के बीच जमशेदपुर प्रयोगशाला का दौरा किया था, जहां उन्होंने जांच करने वाले वैज्ञानिकों से चर्चा की और उनके आधिकारिक बयान दर्ज किए।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि चूंकि अब अंतिम वैज्ञानिक रिपोर्ट मिल चुकी है, इसलिए जांच एजेंसी द्वारपालक मामले की जांच को भी जल्द से जल्द पूरा कर संबंधित अदालत में अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करे। मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 सितंबर की तारीख तय की गई है।

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