POCSO केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने ज़मानत अर्जी खारिज की, पीड़िता की पहचान उजागर करने पर पुलिस को फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक नाबालिग यौन शोषण पीड़िता की पहचान कोर्ट दस्तावेज़ों में उजागर करने पर दिल्ली पुलिस को सख्त फटकार लगाई है और निर्देश दिए हैं कि यौन अपराधों की पीड़िताओं का नाम, पता या माता-पिता की जानकारी किसी भी रिपोर्ट या दस्तावेज़ में दर्ज न की जाए। कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ एक आरोपी की नियमित ज़मानत याचिका भी खारिज कर दी।

मुख्य बिंदु:

  • पुलिस आयुक्त को निर्देश:
    न्यायमूर्ति स्वराणा कांता शर्मा ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वे सभी थाना प्रभारियों (SHO) और जांच अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दें कि यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं की पहचान से जुड़ी कोई जानकारी किसी भी स्थिति में कोर्ट के समक्ष दाखिल दस्तावेज़ों में शामिल न की जाए।
  • स्थिति रिपोर्ट में खुलासा:
    कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई कि मौजूदा मामले में जांच अधिकारी द्वारा दायर स्थिति रिपोर्ट में नाबालिग पीड़िता का नाम उल्लेखित किया गया था, जो कि कानून का उल्लंघन है।
  • पालना सुनिश्चित करने के निर्देश:
    कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि इस निर्णय की प्रति संबंधित डीसीपी और दिल्ली पुलिस आयुक्त को भेजी जाए ताकि वे इसका संज्ञान लें और कानून के अनुसार पालन सुनिश्चित करें।
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मामले की पृष्ठभूमि:
आरोप है कि 2021 में आरोपी ने 12-13 साल की एक नाबालिग लड़की को झांसे में लेकर घर से बाहर ले जाकर एक कमरे में बंद किया और उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। बाद में लड़की को उसके परिजनों ने ढूंढ निकाला और बचाया।

आरोपी ने ज़मानत याचिका में यह दावा किया कि वह पीड़िता की मां के साथ सहमति वाले संबंध में था और पीड़िता को यह रिश्ता पसंद नहीं था, इसलिए उसे फंसाया गया है। उसने यह तर्क भी दिया कि 2021 में कोविड-19 महामारी के कारण लोगों की आवाजाही और सामाजिक संपर्क सीमित थे, इसलिए इस तरह की घटना का होना संदिग्ध है।

कोर्ट की टिप्पणी:
कोर्ट ने आरोपी के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि:

  • महामारी के दौरान घटना होना, पीड़िता के बयान को अविश्वसनीय नहीं बनाता।
  • पीड़िता ने लगातार एक जैसे बयान दिए हैं और पूरी स्पष्टता से घटना का विवरण दिया है।
  • आरोपी और पीड़िता की मां के कथित संबंध का पीड़िता की गवाही पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
  • पीड़िता की मां द्वारा आरोपी से जेल में मुलाक़ात या पैसे लेने के आरोप, इस स्तर पर अपराध की गंभीरता को कम नहीं करते।
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कोर्ट ने कहा, “पीड़िता ने बार-बार यह कहा है कि आरोपी, जिसे वह ‘चाचा’ कहकर बुलाती थी और जिस पर उसने भरोसा किया, ने उसके साथ कई बार यौन शोषण किया। मां के कथित आचरण को, भले ही सही मान लिया जाए, पीड़िता के बयान को खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।”

कोर्ट ने कहा कि बच्चे के खिलाफ हुए अपराध की गंभीरता किसी तीसरे व्यक्ति के आचरण से नहीं आंकी जा सकती। इस आधार पर कोर्ट ने आरोपी की नियमित ज़मानत याचिका खारिज कर दी।

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