श्रद्धा वाकर हत्याकांड: दिल्ली हाईकोर्ट का ट्रायल की समय-सीमा तय करने से इनकार, रोजाना चल रही है सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने श्रद्धा वाकर हत्याकांड के आरोपी आफताब अमीन पूनावाला के खिलाफ चल रहे मुकदमे को पूरा करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत में इस मामले की कार्यवाही पहले से ही रोजाना के आधार पर चलाई जा रही है।

मृतका के भाई द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए जस्टिस मधु जैन ने कहा कि ट्रायल कोर्ट मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी करने का हर संभव प्रयास कर रही है। ऐसे में अदालत द्वारा अलग से कोई निर्देश जारी करने की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से आग्रह किया कि निचली अदालत की मांग के अनुसार विदेशी गवाहों के बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द सुगम बनाया जाए।

157 गवाहों के बयान दर्ज

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अमित प्रसाद ने पीठ को सूचित किया कि निचली अदालत शनिवार और रविवार को छोड़कर सप्ताह के हर कार्यदिवस में इस मामले की सुनवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि मामले में सूचीबद्ध 200 से अधिक गवाहों में से अब तक 157 गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है।

अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित न्याय की मांग

यह याचिका श्रद्धा वाकर के भाई श्रीजय विजय वाकर की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि आपराधिक मुकदमा बिना किसी उचित कारण के लंबे समय से लंबित है। उन्होंने तर्क दिया कि प्रक्रिया में हो रही इस देरी से आपराधिक न्याय प्रणाली की प्रभावशीलता कम हो रही है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत गारंटीकृत त्वरित सुनवाई के अधिकार का हनन करता है।

क्या है पूरा मामला

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आरोप है कि 18 मई 2022 को आफताब अमीन पूनावाला ने अपनी लिव-इन पार्टनर श्रद्धा वाकर की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल 6,629 पन्नों की चार्जशीट के मुताबिक, आफताब ने हत्या के बाद शव के कई टुकड़े किए और उन्हें फ्रिज में संभालकर रखा। मामले का खुलासा होने से बचने के लिए उसने शव के हिस्सों को कई दिनों के दौरान शहर के अलग-अलग सुनसान इलाकों में फेंका था, जिन्हें बाद में जांचकर्ताओं ने बरामद कर लिया।

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