ईद से पहले उत्तम नगर में सांप्रदायिक तनाव की आशंका, दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

दिल्ली के उत्तम नगर और द्वारका इलाकों में ईद के त्योहार के दौरान संभावित सांप्रदायिक हिंसा और हेट स्पीच को रोकने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। अदालत से इस मामले में तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।

‘एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स’ (APCR) द्वारा दायर इस याचिका में होली के दौरान हुई एक दुखद घटना के बाद इलाके में “बिगड़ते माहौल” का हवाला दिया गया है। याचिका में दिल्ली पुलिस और जिला प्रशासन को जीवन और संपत्ति की रक्षा करने के अपने संवैधानिक कर्तव्यों को पूरा करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

मौजूदा तनाव की जड़ें 4 मार्च 2026 की उस घटना में हैं, जब उत्तम नगर में तरुण नामक 26 वर्षीय युवक की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। याचिका के अनुसार, हालांकि यह अलग-अलग समुदायों के परिवारों के बीच एक पड़ोसी विवाद था, लेकिन बाद में इस घटना का “सांप्रदायिक रंग” दे दिया गया।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि भड़काऊ सामग्री के प्रसार और भीड़ को इकट्ठा करने के समन्वित प्रयासों ने एक स्थानीय आपराधिक मामले को बड़े सांप्रदायिक मुद्दे में बदल दिया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि दिल्ली के विभिन्न हिस्सों और विशेष रूप से उत्तम नगर में आयोजित “आक्रोश सभाओं” और रैलियों में भड़काऊ भाषण दिए गए, जिनमें मुस्लिम समुदाय के आर्थिक और सामाजिक बहिष्कार का आह्वान किया गया।

ईद का त्योहार 20 या 21 मार्च 2026 को होने की उम्मीद है, और याचिका में इस दौरान होने वाली संभावित घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई सार्वजनिक सभाओं में स्पष्ट रूप से उत्तम नगर में ईद मनाने से रोकने की वकालत की गई है।

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इसके अलावा, याचिका में उन ऑनलाइन पोस्टरों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है जिनमें ईद के ही दिन उत्तम नगर में “होली मनाने” का प्रचार किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस तरह की गतिविधियां एक विशेष समुदाय को उकसाने और शांति भंग करने के लिए की जा रही हैं।

सीनियर एडवोकेट नित्या रामकृष्णन के माध्यम से और एडवोकेट एम हुजैफा व शाहरुख आलम द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य अधिकारी कार्रवाई करने में विफल रहे हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे हेट स्पीच के खिलाफ बिना किसी औपचारिक शिकायत का इंतजार किए ‘स्वत: संज्ञान’ लेकर कार्रवाई करें।

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याचिका में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु उठाए गए हैं:

  • हेट स्पीच: सार्वजनिक रूप से उपलब्ध साक्ष्य भारतीय न्याय संहिता (BNS) और यूएपीए (UAPA) के तहत संज्ञेय अपराध दर्शाते हैं, फिर भी कोई पर्याप्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।
  • आर्थिक प्रभाव: हिंसा के डर से कई मुस्लिम स्वामित्व वाली दुकानें बंद हैं और कुछ परिवारों ने सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से घर छोड़ दिए हैं।
  • अतिरिक्त न्यायिक आह्वान: रैलियों में तरुण हत्याकांड के आरोपियों के “एनकाउंटर” और उनके घरों को ध्वस्त करने की मांग की गई है।
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इस याचिका में दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और जिला प्रशासन को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में मांग की गई है कि ईद के दौरान शांति बनाए रखने के लिए हेट स्पीच, लक्षित भेदभाव और हिंसा या तोड़फोड़ की किसी भी घटना को रोकने के निर्देश जारी किए जाएं।

इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष पेश किया गया, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि इलाके में व्याप्त भय और शत्रुता के माहौल को देखते हुए तत्काल न्यायिक निगरानी की आवश्यकता है।

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