बीमार पिता से मिलने के लिए सांसद राशिद इंजीनियर को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली एक हफ्ते की अंतरिम जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को बारामूला के सांसद अब्दुल राशिद शेख, जिन्हें ‘राशिद इंजीनियर’ के नाम से भी जाना जाता है, को उनके बीमार पिता से मिलने और उनकी देखभाल करने के लिए एक सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी है।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने राशिद को यह राहत प्रदान की। राशिद 2019 से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत हिरासत में हैं। कोर्ट ने उनके मौजूदा सांसद होने और पिछले जमानत आदेशों के पालन के रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया, हालांकि ट्रायल में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप को रोकने के लिए कई कड़े प्रतिबंध भी लगाए गए हैं।

अब्दुल राशिद शेख को 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा जांच किए जा रहे एक टेरर-फंडिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था। NIA के आरोप पत्र के अनुसार, आरोपियों पर जम्मू-कश्मीर में अशांति और अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए अवैध धन का उपयोग करने का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों ने पाकिस्तान की ISI के साथ मिलकर नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमलों की साजिश रची थी।

हाईकोर्ट में यह अपील ट्रायल कोर्ट के 24 अप्रैल के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें राशिद की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने उन आरोपों पर गौर किया था जिनमें कहा गया था कि पिछली जमानत अवधि के दौरान राशिद ने एक संरक्षित गवाह सहित अन्य गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास किया था।

राशिद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन और अधिवक्ता विख्यात ओबेरॉय ने तर्क दिया कि गवाहों को धमकाने के आरोप “निराधार” हैं। उन्होंने मानवीय आधार पर जोर देते हुए कहा कि राशिद के पिता की गंभीर चिकित्सा स्थिति को देखते हुए अंतरिम जमानत देना न्यायसंगत है।

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दूसरी ओर, NIA की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और विशेष वकील अक्षय मलिक ने याचिका का कड़ा विरोध किया। लूथरा ने दलील दी कि ऐसे सबूत मौजूद हैं जो गवाहों को प्रभावित करने के प्रयासों की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि एक गवाह पहले ही मुकर चुका है और उसने एजेंसी पर ही आरोप लगाए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बिना शर्त जमानत देने से ट्रायल में हस्तक्षेप का गंभीर खतरा बना रहेगा।

रिकॉर्ड्स का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि राशिद को पहले भी 48 दिनों की जमानत दी जा चुकी है और वह वर्तमान में लोकसभा के सदस्य हैं। बेंच ने इसे अंतरिम राहत के लिए एक “उपयुक्त मामला” माना, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए।

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अदालत ने कहा, “रिकॉर्ड को देखने और तथ्यों पर विचार करने के बाद, इस अदालत की राय है कि यह निम्नलिखित शर्तों पर 1 सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत देने का एक उपयुक्त मामला है।”

NIA की चिंताओं को दूर करने के लिए कोर्ट ने निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य की हैं:

  • सुरक्षा घेरा: जेल से बाहर आने से लेकर सातवें दिन वापस लौटने तक, पूरी यात्रा और प्रवास के दौरान राशिद के साथ कम से कम दो सादे कपड़ों वाले पुलिसकर्मी मौजूद रहेंगे।
  • स्थान संबंधी प्रतिबंध: उन्हें केवल अपने निवास स्थान या उस स्थान पर रहने की अनुमति होगी जहां उनके पिता का इलाज चल रहा है।
  • आगंतुकों पर नियंत्रण: कोर्ट ने निर्देश दिया कि पिता के साथ रहने के दौरान “तत्काल परिवार के सदस्यों के अलावा किसी भी बाहरी व्यक्ति को मिलने की अनुमति नहीं होगी।”
  • व्यक्तिगत मुचलका: राशिद को 1 लाख रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड और इतनी ही राशि की जमानत राशि जमा करनी होगी।
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यह अंतरिम जमानत अवधि उनकी रिहाई की तारीख से शुरू होगी और सातवें दिन जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण के साथ समाप्त होगी।

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