दिल्ली के जनकपुरी इलाके में स्थित एक निजी स्कूल में तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने मामले की सह-आरोपी और स्कूल की शिक्षिका की जमानत रद्द करते हुए उन्हें तीन दिनों के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। जस्टिस सौरभ बनर्जी की एकल पीठ ने दिल्ली पुलिस की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें निचली अदालत द्वारा शिक्षिका को दी गई राहत को चुनौती दी गई थी।
मुख्य आरोपी की जमानत पहले ही हो चुकी है खारिज
इस संवेदनशील मामले में हाईकोर्ट का यह दूसरा बड़ा सख्त रुख है। इससे पहले, बीती 29 जून को कोर्ट ने मामले के मुख्य आरोपी यानी स्कूल के केयरटेकर को मिली जमानत को भी खारिज कर दिया था। कोर्ट ने उसे 1 जुलाई तक कानून के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।
शिक्षिका पर घटना छिपाने और सहयोग न करने का आरोप
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी महिला टीचर पर आरोप है कि उन्होंने बच्ची के साथ हुई इस दरिंदगी की बात जानने के बावजूद इसे स्कूल प्रशासन और पुलिस से जानबूझकर छिपाया। शिक्षिका को पुलिस ने 14 मई को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद ट्रायल कोर्ट ने उन्हें एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा था। बाद में, 20 मई को ट्रायल कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने पलट दिया है। जस्टिस सौरभ बनर्जी ने साफ किया कि आरोपी शिक्षिका को अब तीन दिन के भीतर कानून के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।
स्कूल के दूसरे ही दिन हुई थी दरिंदगी
यह मामला इस साल मई की शुरुआत में तब रोशनी में आया, जब पीड़ित बच्ची की मां ने 1 मई को पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के मुताबिक, तीन साल की बच्ची का इस प्राइवेट स्कूल में नया दाखिला हुआ था और 30 अप्रैल को स्कूल में उसका दूसरा ही दिन था।
दोपहर को जब बच्ची घर लौटी, तो उसने शरीर में तेज दर्द की शिकायत की। मां ने जब प्यार से पूछताछ की, तो बच्ची ने बताया कि स्कूल के केयरटेकर ने उसे परिसर के एक सुनसान हिस्से में ले जाकर उसके साथ गलत काम किया था।
कड़े विरोध के बावजूद निचली अदालत से मिली थी राहत
मां की शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़िता द्वारा शिनाख्त किए जाने के बाद 1 मई को ही आरोपी केयरटेकर को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि, अभियोजन पक्ष के भारी विरोध के बावजूद द्वारका की एक अदालत ने 7 मई को उसे जमानत दे दी थी।
पुलिस ने इस पूरे मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1) (दुष्कर्म के लिए सजा) और पॉक्सो (POCSO) कानून की धारा 6 (गंभीर यौन उत्पीड़न के लिए सजा) के तहत मामला दर्ज किया है, जिसकी जांच अभी जारी है।

