आनंद विहार बस टर्मिनल के कायाकल्प की तैयारी; दिल्ली हाईकोर्ट ने सौंदर्यीकरण और पुनर्विकास के लिए बनाई स्पेशल टास्क फोर्स

दिल्ली हाईकोर्ट ने आनंद विहार बस टर्मिनल को एक आधुनिक ट्रांसपोर्ट हब में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने टर्मिनल के सौंदर्यीकरण, पुनर्विकास और रखरखाव के लिए एक ‘स्पेशल टास्क फोर्स’ (STF) का गठन किया है। यह निर्णय यात्रियों और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिया गया है, क्योंकि यह टर्मिनल बस स्टैंड के साथ-साथ रेलवे स्टेशन और मेट्रो का भी एक प्रमुख केंद्र है।

दिल्ली हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने आनंद विहार क्षेत्र में वेंडिंग गतिविधियों से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। हाईकोर्ट ने पाया कि इस क्षेत्र का पुनर्विकास किसी एक एजेंसी के बस की बात नहीं है क्योंकि इसमें कई विभागों का अधिकार क्षेत्र शामिल है। इसके समाधान के लिए, शहरी विकास विभाग के संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स गठित की गई है। कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को निर्देश दिया है कि वह 26 मई तक सौंदर्यीकरण की विस्तृत योजना पेश करे।

यह मामला मुख्य रूप से आनंद विहार क्षेत्र में अनधिकृत रेहड़ी-पटरी (वेंडिंग) गतिविधियों से जुड़ी चिंताओं के बाद शुरू हुआ, जिससे जनता के आवागमन में बाधा उत्पन्न हो रही थी। जनवरी में हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि इस टर्मिनल क्षेत्र को “ठीक से पुनर्गठित, व्यवस्थित और लैंडस्केप” करने की आवश्यकता है। अदालत का विजन है कि यहाँ यात्रियों के लिए दुकानों, कैफे, विश्राम क्षेत्रों और बेहतर स्वच्छता जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हों।

आनंद विहार की जटिल भौगोलिक स्थिति को देखते हुए, जहाँ बस, रेल और मेट्रो का संगम होता है, जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने एसटीएफ में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शामिल करने का निर्देश दिया है:

  • दिल्ली नगर निगम (MCD) – डिप्टी और असिस्टेंट कमिश्नर।
  • लोक निर्माण विभाग (PWD)।
  • दिल्ली परिवहन विभाग।
  • भारतीय रेलवे।
  • दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC)।
  • नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) और रैपिड रेल (RRTS)।
  • सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग।
  • दिल्ली पुलिस – पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया के एसएचओ।
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हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि “आनंद विहार बस टर्मिनल क्षेत्र का पुनर्विकास किसी एक विशेष एजेंसी द्वारा स्वतंत्र आधार पर नहीं किया जा सकता,” इसलिए यह एकीकृत टास्क फोर्स आवश्यक है।

5 मई के अपने आदेश में, हाईकोर्ट ने परियोजना को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए:

  1. आर्किटेक्चरल विजन: PWD को एक योग्य आर्किटेक्ट की सेवाएं लेने का निर्देश दिया गया है। यह आर्किटेक्ट सौंदर्यीकरण और लैंडस्केपिंग का विस्तृत प्लान, प्रॉपर स्केच और 3D इलेक्ट्रॉनिक प्रजेंटेशन तैयार करेगा।
  2. वेंडिंग का नियमन: अधिकृत स्ट्रीट वेंडर्स के लिए विशिष्ट स्थान चिन्हित किए जाएंगे। कोर्ट ने सुनिश्चित करने को कहा है कि वेंडिंग गतिविधियां साफ-सुथरे और स्वच्छ तरीके से की जाएं ताकि यात्रियों को परेशानी न हो।
  3. पुलिस की भूमिका: दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया गया है कि योजना फाइनल होने तक क्षेत्र में कोई भी अनधिकृत वेंडिंग न होने दी जाए।
  4. समय सीमा: टास्क फोर्स की पहली बैठक 20 मई को होगी और टास्क फोर्स द्वारा अनुमोदित अंतिम योजना 26 मई को हाईकोर्ट के समक्ष रखी जाएगी।
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कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे आनंद विहार टर्मिनल के विकास और रखरखाव के लिए टास्क फोर्स को अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें।

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