कानूनी ड्राफ्टिंग के लिए AI का सहारा न लें: CJI सूर्या कांत ने नए एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड को दी बाहरी आउटसोर्सिंग के खिलाफ चेतावनी

 भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत ने नए एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) के बैच को एक कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि कानूनी पेशे के नैतिक दायित्वों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) या किसी बाहरी पक्ष को आउटसोर्स नहीं किया जा सकता। शुक्रवार को आयोजित एक इंडक्शन कार्यक्रम के दौरान उन्होंने वकीलों को याद दिलाया कि उनकी भूमिका महज एक पदवी नहीं, बल्कि ‘अदालत के अधिकारी’ (ऑफिसर्स ऑफ द कोर्ट) के रूप में एक बड़ी जिम्मेदारी है।

संविधान के अनुच्छेद 145 के तहत बनाए गए नियमों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में किसी पक्ष की ओर से केवल नामांकित एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड ही पैरवी कर सकते हैं। यह विशेष दर्जा केवल उन वकीलों को मिलता है जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित एक कठिन परीक्षा को सफलतापूर्वक पास करते हैं।

CJI कांत ने कहा कि एओआर (AoR) बनना एक वकील के करियर का एक “महत्वपूर्ण पड़ाव” है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वे वादियों और सुप्रीम कोर्ट के बीच जिम्मेदारी की मुख्य कड़ी हैं, जिसके लिए अत्यधिक सतर्कता और परिश्रम की आवश्यकता होती है।

तकनीकी प्रगति के दौर में, मुख्य न्यायाधीश ने बाहरी सहायता के उपयोग को लेकर स्पष्ट चेतावनी दी। उन्होंने नए वकीलों से अपील की कि वे सभी कानूनी ड्राफ्टिंग व्यक्तिगत रूप से करें और मुख्य कानूनी कार्यों के लिए AI या किसी तीसरे पक्ष पर निर्भर रहने की प्रवृत्ति से बचें।

CJI ने कहा, “फाइलिंग को एक सामान्य अभ्यास न समझें। प्रत्येक ब्रीफ को ध्यान से पढ़ें।” उन्होंने स्पष्ट किया कि एओआर के नाम वाली प्रत्येक याचिका उनके पेशेवर निर्णय और निष्ठा का सीधा प्रतिबिंब होती है।

सुप्रीम कोर्ट की गरिमा और कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए, CJI कांत ने नए बैच के लिए कुछ अनिवार्य बातें रेखांकित कीं:

  • व्यक्तिगत तत्परता: यह सुनिश्चित करना होगा कि याचिकाएं सही ढंग से ड्राफ्ट की गई हैं और तथ्यों की सूक्ष्मता से जांच की गई है।
  • स्वतंत्रता: एओआर को केवल अन्य वकीलों के निर्देशों के आधार पर मामला फाइल करने से बचना चाहिए। उन्हें अपनी ओर से भी स्वतंत्र जांच (ड्यू डिलिजेंस) करनी चाहिए।
  • मजबूत कानूनी आधार: प्रत्येक याचिका का कानूनी आधार ठोस और शोध पर आधारित होना चाहिए।
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CJI ने आगे कहा कि अनुभव समय के साथ आता है, लेकिन “पेशेवर विश्वसनीयता पहले दिन से ही स्थापित होनी चाहिए।” उन्होंने ईमानदारी, गहन तैयारी और न्यायिक संस्थान के प्रति सम्मान को एक सफल वकालत के स्तंभ बताया।

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