सीजीपीएससी पेपर लीक: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व सचिव की जमानत अर्जी खारिज की, कहा- यह हत्या से भी बड़ा अपराध

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की 2021 मुख्य परीक्षा पेपर लीक मामले में नामजद पूर्व सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका खारिज कर दी है। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने सख्त रुख अपनाया और कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं का पर्चा लीक करना किसी व्यक्ति की हत्या करने से भी अधिक जघन्य अपराध है।

62 वर्षीय जीवन किशोर ध्रुव पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने बेटों को परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए थे। इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पिछले साल सितंबर में उन्हें और उनके बेटे सुमित ध्रुव को गिरफ्तार किया था।

युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि हत्या जैसा अपराध केवल एक परिवार को प्रभावित करता है, लेकिन भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने से ईमानदारी से तैयारी करने वाले लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद होता है, जिससे पूरे समाज पर बुरा असर पड़ता है। अदालत ने पूर्व प्रशासनिक अधिकारी के इस आचरण की तुलना ‘बाड़ ही फसल को खाने’ से की। जांच रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और साक्ष्यों का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह साफ होता है कि आरोपी ने अपने बेटे को वही विषय तैयार करवाए जो परीक्षा में पूछे गए थे।

सीबीआई ने जताया कड़ा विरोध

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अदालत में जमानत का कड़ा विरोध करते हुए सीबीआई के वकील वैभव गोवर्धन ने पक्ष रखा कि लोक सेवा आयोग के सचिव पद पर रहते हुए परीक्षा की पूर्ण गोपनीयता बनाए रखना ध्रुव का मुख्य संवैधानिक व प्रशासनिक दायित्व था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि आरोपी ने निजी लाभ के लिए अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर परीक्षा की गोपनीयता भंग की। इस लीक सामग्री के बल पर उनके एक बेटे सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ। सीबीआई ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर हुई धांधली से सार्वजनिक भर्ती प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

बचाव पक्ष ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

दूसरी तरफ, ध्रुव के वकील देवर्शी ठाकुर ने अदालत के समक्ष दावा किया कि उनके मुवक्किल को केवल उनके प्रशासनिक पद के कारण बलि का बकरा बनाया गया है और वे पूरी तरह निर्दोष हैं। बचाव पक्ष ने दलील दी कि मूल एफआईआर में ध्रुव का नाम शामिल नहीं था और जांच के दौरान उनके पास से केवल एक मोबाइल फोन जब्त किया गया है। उनके खिलाफ पेपर लीक करने या गुप्त जानकारी साझा करने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला है।

अदालत को यह भी बताया गया कि ध्रुव ने परीक्षा से पूर्व ही अधिकारियों को अपने बेटों के उम्मीदवार होने की जानकारी दे दी थी और स्वयं को गोपनीय कार्यों से अलग कर लिया था, जिसकी पुष्टि आधिकारिक प्रशासनिक आदेशों से होती है। वकील ने कहा कि ध्रुव का एक बेटा परीक्षा में असफल रहा था, जबकि दूसरा बेटा शीर्ष स्थानों से काफी नीचे रहा।

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मुकदमे में देरी और समानता का तर्क

बचाव पक्ष ने ध्यान दिलाया कि आरोपी 18 सितंबर 2025 से हिरासत में हैं और उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा है। मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और 100 से अधिक गवाहों के बयान होने बाकी हैं, जिससे निकट भविष्य में मुकदमा समाप्त होने की उम्मीद नहीं है। इसके अलावा, मामले के एक अन्य सह-आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। ध्रुव के भागने या गवाहों को प्रभावित करने की कोई संभावना नहीं है। हालांकि, हाईकोर्ट ने सरकारी परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया।

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