केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने पश्चिमी एशिया (खाड़ी देशों) में परीक्षा रद्द होने से प्रभावित हुए कक्षा 12वीं के प्राइवेट छात्रों के लिए एक नया मूल्यांकन फॉर्मूला तैयार किया है। क्षेत्र में हालिया ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण सीबीएसई को सात खाड़ी देशों में अपनी बोर्ड परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी थीं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस एस वी एन भट्टी और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ को बताया कि 21 जून को अधिसूचित इस नई नीति के तहत एक विशेष फॉर्मूला विकसित किया गया है। इसके तहत, जिन विषयों की परीक्षाएं रद्द हो गई थीं, उनके अंकों की गणना छात्र के कक्षा 10वीं के थ्योरी अंकों के 40 प्रतिशत और उनकी पिछली कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा के थ्योरी अंकों के 60 प्रतिशत को मिलाकर की जाएगी।
यह नया फॉर्मूला बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सहित सात देशों में प्रभावित हुए छात्रों पर लागू होगा।
प्राइवेट छात्रों के लिए नए फॉर्मूले की जरूरत क्यों पड़ी
पीठ के समक्ष केंद्र और सीबीएसई का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि परीक्षाएं रद्द होने से दो तरह के छात्र प्रभावित हुए थे—नियमित (रेगुलर) स्कूल जाने वाले छात्र और प्राइवेट (गैर-नियमित) छात्र।
नियमित छात्रों का मूल्यांकन स्कूल के आंतरिक रिकॉर्ड जैसे तिमाही, छमाही और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के आधार पर किया जा सकता था, जो कि बोर्ड की 27 मार्च की मूल मूल्यांकन योजना का मुख्य आधार था। इसके विपरीत, प्राइवेट छात्रों के पास ऐसा कोई स्कूल रिकॉर्ड या आंतरिक मूल्यांकन का डेटा उपलब्ध नहीं था। इस वजह से उनके रिजल्ट को लेकर एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी, जिसे दूर करने के लिए यह नई नीति लाई गई है।
सऊदी अरब के छात्र की याचिका पर हुई सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट दरअसल अल जुबैल, सऊदी अरब में रहने वाले एक प्राइवेट छात्र प्रांशु जिगरकुमार पटेल की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। पटेल ने अपनी कक्षा 12वीं की सुधार परीक्षा (इंप्रूवमेंट एग्जाम) के परिणाम घोषित न किए जाने के सीबीएसई के फैसले को चुनौती दी थी। उनका परिणाम “रिजल्ट लेटर” (आर.एल.) श्रेणी में रोक दिया गया था, जिससे उनके उच्च शिक्षा के अवसरों पर संकट मंडरा रहा था।
याचिकाकर्ता ने भौतिकी (फिजिक्स) और रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) की परीक्षाएं दी थीं, जिनका मूल्यांकन उनके वास्तविक अंकों के आधार पर किया गया था। वहीं, गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर साइंस की परीक्षाएं रद्द होने के कारण उनका मूल्यांकन 21 जून को घोषित नए फॉर्मूले के तहत किया गया है।
अदालत ने याचिका का निपटारा किया
तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि नए फॉर्मूले के तहत पटेल के अंक उनके पुराने प्रदर्शन से काफी बेहतर आए हैं। उनका यह नया परिणाम उन्हें ईमेल के माध्यम से भेज दिया गया है और इसे जल्द ही उनके डिजीलॉकर पर भी अपडेट कर दिया जाएगा। नीति में यह भी प्रावधान है कि यदि कोई छात्र इस नए मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं है, तो वह आगामी नियमित बोर्ड परीक्षा में शामिल हो सकता है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील विनीत जिंदल ने परिणाम घोषित होने की बात स्वीकार की। हालांकि, उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि छात्र को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपियां प्राप्त करने और दोबारा मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) की मांग करने का अधिकार दिया जाए।
पीठ ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि मूल याचिका में इस तरह की कोई राहत नहीं मांगी गई थी और अदालत बिना किसी पूर्व लिखित अनुरोध के राहत प्रदान नहीं कर सकती। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल के बयानों को दर्ज करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया और छात्र को भविष्य में किसी भी शिकायत के लिए उचित कानूनी रास्ते अपनाने की स्वतंत्रता दी।

