अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं और हेराफेरी की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। सोमवार को दो वकीलों द्वारा दाखिल की गई इस याचिका में मामले की जांच के लिए सीबीआई के नेतृत्व में एक बहु-विषयक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देने की मांग की गई है।
यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने संयुक्त रूप से दायर की है। इसमें अदालत से अपील की गई है कि वह केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को चंदे की सुरक्षा के लिए मजबूत नियमन, निगरानी और ऑडिट प्रणाली लागू करने का निर्देश दे। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि चंदे की सुरक्षा देश के करोड़ों श्रद्धालुओं और दानदाताओं के भरोसे को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।
श्रद्धालुओं की आस्था और स्वतंत्र जांच की जरूरत
याचिका में कहा गया है कि फंड की हेराफेरी और अन्य कथित गड़बड़ियों की खबरें, चाहे वे बाद में सच साबित हों या नहीं, उन लोगों के बीच गहरी चिंता का कारण बनी हैं जिन्होंने अयोध्या की गरिमा की बहाली के लिए लंबा संघर्ष किया है। याचिकाकर्ताओं ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा सिर्फ संभावित आपराधिक अपराधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध लाखों भक्तों की आस्था, भावना और विश्वास से है।
राज्य सरकार की जांच पर उठाए सवाल
याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पहले से गठित की गई जांच समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि राज्य सरकार की एसआईटी ने अभी तक बिना किसी एफआईआर या औपचारिक आपराधिक मामला दर्ज किए ही अपनी जांच शुरू कर दी है।
याचिका के अनुसार, प्रशासनिक अधिकारियों की सदस्यता वाली ऐसी टीम के पास जटिल वित्तीय और आपराधिक मामलों की जांच के लिए जरूरी विशेषज्ञता या संसाधन नहीं होते। इसके बजाय, किसी एक विशेषज्ञ एजेंसी के पेशेवर नेतृत्व में होने वाली स्वतंत्र जांच ही जनता में वास्तविक विश्वास पैदा कर सकती है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व में गठित एसआईटी
इससे पहले, राम मंदिर ट्रस्ट को मिले चंदे में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद, ट्रस्ट की ही सिफारिश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। इस तीन सदस्यीय जांच दल में लखनऊ के मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

