कोलकाता के टॉलीगंज इलाके में कथित रूप से वक्फ संपत्ति पर बने निर्माण को गिराने पहुंची कोलकाता नगर निगम (केएमसी) और पुलिस की टीम को उस समय अपनी कार्रवाई रोकनी पड़ी, जब कलकत्ता हाईकोर्ट ने डिमोलिशन पर 30 दिनों का अंतरिम स्टे दे दिया। रविवार सुबह जब नगर निगम का दस्ता बुलडोजर और भारी सुरक्षा बलों के साथ मौके पर पहुंचा, तब अदालत के इस आदेश से वहां रह रहे लोगों को तात्कालिक राहत मिली।
अचानक चस्पा हुआ नोटिस और मौके पर बढ़ा तनाव
मामला टॉलीगंज के सतीश मुखर्जी रोड स्थित मकान संख्या 51/1ए और 51/1बी से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के वकील जोहैब रऊफ ने हाईकोर्ट को बताया कि नगर निगम द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के खिलाफ पहले से ही एक रिट याचिका अदालत में लंबित थी। इसके बावजूद शनिवार को केएमसी अधिकारियों ने कोलकाता नगर निगम अधिनियम, 1980 की धारा 544 और 546 के तहत इमारत की दीवार पर डिमोलिशन का नोटिस चिपका दिया। नोटिस में रविवार सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे के बीच तोड़फोड़ की कार्रवाई तय की गई थी।
रविवार तड़के पुलिस, केंद्रीय बल, केएमसी और कलकत्ता इलेक्ट्रिक सप्लाई कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीईएससी) के अधिकारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंच गए। अचानक हुई इस कार्रवाई से प्रभावित लोग सड़कों पर उतर आए और विरोध जताने लगे। एक निवासी ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा, “हम अब कहां जाएंगे? हमें रातों-रात मकान खाली करने का निर्देश दिया गया।”
हाईकोर्ट की टिप्पणी और कानूनी रास्ते का विकल्प
जस्टिस राजा बासु चौधरी की एकल पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। राज्य सरकार के वकील ने अदालत में पक्ष रखा कि पुलिस और प्रशासन केवल नगर निगम की ओर से जारी औपचारिक मांग (रिक्विजिशन) के आधार पर कार्रवाई में सहयोग कर रहे थे।
सुनवाई के दौरान जस्टिस राजा बासु चौधरी ने ध्यान दिलाया कि याचिकाकर्ता को डिमोलिशन के इस आदेश की जानकारी शनिवार को दीवार पर नोटिस चिपकाए जाने के बाद ही मिली। अदालत ने स्पष्ट किया कि केएमसी के स्पेशल ऑफिसर (बिल्डिंग) के मूल आदेश के गुणों-दोषों पर फिलहाल कोई विचार नहीं किया गया है। कोर्ट ने 30 दिनों के लिए डिमोलिशन पर रोक लगाते हुए याचिकाकर्ता को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपनी कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने की छूट दी।
मौके पर हाथापाई और अनिश्चित दावे
घटनास्थल पर जारी गहमागहमी के बीच कुमार साहा नामक व्यक्ति ने दावा किया कि जब वह इमारत का जायजा लेने पहुंचे तो स्थानीय लोगों ने उनके साथ मारपीट की और खदेड़ दिया। साहा ने कहा, “यह वक्फ की जमीन है और लोग यहां अवैध रूप से रह रहे हैं। पहले यहां तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का पार्टी कार्यालय चलता था।” हालांकि, उक्त परिसर या किसी सरकारी संस्था के साथ कुमार साहा के संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी।

