सड़क हादसे में मारे गए सरकारी डॉक्टर के परिजनों को मिलेगा 1 करोड़ का मुआवजा, कलकत्ता हाईकोर्ट ने बढ़ाई रकम

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले राज्य सरकार के एक डॉक्टर के परिजनों को मिलने वाली मुआवजे की राशि बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी मृतक व्यक्ति की वार्षिक आय का आकलन करने के लिए उसका आधिकारिक आयकर रिटर्न (आईटीआर) ही सबसे प्रामाणिक और वैधानिक आधार है।

जस्टिस विश्वरूप चौधरी की पीठ ने 17 जुलाई को यह फैसला सुनाते हुए मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल के उस पुराने आदेश में संशोधन किया, जिसमें पीड़ित परिवार को लगभग 89 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को 50-50 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। दोनों बीमा कंपनियों को याचिका दायर करने की तारीख से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ यह राशि तीन महीने के भीतर जमा करनी होगी।

आयकर रिटर्न बना मुआवजे का मुख्य आधार

पीड़ित परिवार की ओर से अदालत में पेश हुए अधिवक्ता शाश्वत भट्टाचार्य ने तर्क दिया था कि निचली अदालत ने केवल वेतन को आय का आधार मानकर गलती की और आयकर रिटर्न की अनदेखी की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले ‘अंजलि व अन्य बनाम लाकेंद्र राठौड़ व अन्य’ का हवाला देते हुए कहा कि वार्षिक आय तय करने के लिए आयकर रिटर्न एक आधिकारिक वैधानिक दस्तावेज है। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए मुआवजे की गणना आईटीआर में दर्शाई गई आय के अनुसार करने का निर्देश दिया।

मामले की सुनवाई के दौरान मृतक की पत्नी को मिल रही 69,000 रुपये की मासिक पेंशन का मुद्दा भी उठा। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि पेंशन या मृत्यु लाभ मिलने से आश्रितों का मुआवजा मांगने का अधिकार खत्म नहीं होता और न ही इसे मुआवजे की राशि से सीधे काटा जा सकता है। हालांकि, न्यायसंगत मुआवजा तय करते समय गणितीय गणना के साथ इस तथ्य को ध्यान में रखा जा सकता है।

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बीमा कंपनी की याचिका खारिज, दोनों चालकों की लापरवाही बरकरार

हाईकोर्ट ने न्यू इंडिया एश्योरेंस की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपनी वित्तीय जिम्मेदारी से छूट मांगी थी। बीमा कंपनी की अधिवक्ता सायंती सांतरा ने दावा किया था कि हादसा पूरी तरह से कार चालक की लापरवाही के कारण हुआ था और मृतक कार में बिना किराया दिए यात्रा कर रहे थे, जिसके लिए अतिरिक्त प्रीमियम का भुगतान नहीं किया गया था।

अदालत ने इस तर्क को नकारते हुए दोनों चालकों की संयुक्त लापरवाही के फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने कहा कि जब पुलिस जांच में दोनों वाहनों के चालकों को जिम्मेदार पाया गया है, तो जांच अधिकारी से पूछताछ किए बिना इस रिपोर्ट को खारिज नहीं किया जा सकता।

बांकुड़ा बाईपास रोड पर हुआ था हादसा

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यह पूरा मामला बांकुड़ा बाईपास रोड पर हुई एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा है। राज्य सरकार के चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिजीत दे अपने एक अन्य डॉक्टर साथी के साथ मारुति स्विफ्ट डिजायर कार से जा रहे थे, तभी एक तेज रफ्तार डंपर ट्रक ने उनकी कार को टक्कर मार दी। इस हादसे में डॉ. अभिजीत दे की मौत हो गई, जबकि उनके साथी डॉक्टर घायल हो गए थे।

घटना के बाद डॉ. दे की पत्नी, बेटे और मां ने मुआवजे के लिए दावा दायर किया था। ट्रिब्यूनल ने करीब 89 लाख रुपये का मुआवजा तय करते हुए दोनों बीमा कंपनियों को आधी-आधी राशि देने का निर्देश दिया था। इस फैसले के खिलाफ परिजनों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में अपील की थी, जबकि बीमा कंपनी ने अपनी देनदारी को चुनौती दी थी।

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