उत्तर प्रदेश में शिक्षण संस्थानों के बाहर ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जो स्कूल अपने परिसरों के बाहर ट्रैफिक मार्शल तैनात करने में लापरवाही बरतेंगे, उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस बी आर सिंह की पीठ ने लखनऊ के पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक) को आदेश दिया है कि वे उन सभी स्कूलों को तुरंत नोटिस जारी करें जिन्होंने अब तक मार्शल तैनात नहीं किए हैं और न ही इस संबंध में कोई प्रस्ताव जमा किया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तिथि निर्धारित की गई है।
लापरवाह स्कूलों पर होगी सख्त कार्रवाई
सुनवाई के दौरान पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि कोई स्कूल हाईकोर्ट के निर्देशों का तीन या उससे अधिक बार उल्लंघन करता पाया जाता है, तो इसकी जानकारी तुरंत अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए। ऐसे मामलों में अदालत अगली रणनीति तय करते हुए दोषी शिक्षण संस्थानों के विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगी।
1 अगस्त से राज्यभर में शुरू होगा निरीक्षण
अदालत में सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता ने सूचित किया कि चयन प्रक्रिया के तहत संबंधित एजेंसी के साथ अनुबंध निष्पादित हो चुका है। आगामी 1 अगस्त से प्रदेश भर के स्कूलों का भौतिक निरीक्षण कार्य शुरू होने की संभावना है।
इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण का काम केवल प्रशिक्षित और योग्य कर्मियों द्वारा ही कराया जाना चाहिए। राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि अभियान शुरू करने से पूर्व निरीक्षण टीम के प्रत्येक सदस्य की योग्यताओं और क्रेडेंशियल्स का पूर्ण सत्यापन सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने पहले चरण के निरीक्षण को बेहद संवेदनशील मानते हुए कहा कि प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की व्यावहारिक कठिनाई आने पर अपर महाधिवक्ता के जरिए तुरंत अदालत को अवगत कराया जाए ताकि आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा सकें।
गेट नंबर 6ए खुलने से सुधरी यातायात व्यवस्था
अदालत को यह भी बताया गया कि लखनऊ के लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल ने अपने परिसर का गेट नंबर 6ए खोल दिया है। इस व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को छोड़ने और ले जाने वाले वाहन अब बाहर मुख्य सड़क पर रुकने के बजाय सीधे स्कूल परिसर के भीतर से होकर गुजरते हैं, जिससे आसपास के क्षेत्र में वाहनों का दबाव कम हुआ है और यातायात सुचारू हुआ है।
इसके साथ ही पीठ ने संज्ञान लिया कि कई विद्यालय मिलकर यातायात नियमन के लिए एक साझा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि यह एसओपी तैयार होते ही इसे सभी स्कूलों में अनिवार्य रूप से लागू किया जाए ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा के साथ-साथ सड़कों पर आवागमन सुगम बनाया जा सके।

