कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्र को पश्चिम बंगाल में मनरेगा लागू करने का निर्देश दिया, बकाया भुगतान पर चार सप्ताह में जवाब मांगा

कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह तत्काल प्रभाव से पश्चिम बंगाल में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना लागू करे। अदालत ने साथ ही केंद्र को चार सप्ताह के भीतर लाभार्थियों के बकाया भुगतान के संबंध में हलफनामा दाखिल करने का समय दिया।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा, “जहां तक बकाया भुगतान का प्रश्न है, केंद्र और अन्य प्रतिवादियों को चार सप्ताह का समय दिया जाता है ताकि वे अपना हलफनामा दाखिल करें।” अदालत ने याचिकाकर्ताओं को भी इसके दो सप्ताह बाद प्रत्युत्तर दाखिल करने की अनुमति दी और मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद तय की।

अदालत ने कहा कि उसने पहले ही केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल में मनरेगा के लाभ रोकने की कार्रवाई को अनुचित बताया था। उस फैसले को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने 27 अक्टूबर को केंद्र की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी।

इस पर अदालत ने कहा कि अब राज्य में मनरेगा लागू करने में कोई बाधा नहीं है। केंद्र की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अशोक कुमार चक्रवर्ती ने भी अदालत को बताया कि “मनरेगा को आगे के लिए लागू करने में कोई अवरोध नहीं है।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार राज्य के कुछ जिलों में कथित अनियमितताओं की जांच जारी रख सकती है, लेकिन जांच की आड़ में वास्तविक लाभार्थियों को योजना से वंचित नहीं किया जा सकता। खंडपीठ ने यह भी कहा कि याचिकाओं की ग्राह्यता (maintainability) का प्रश्न आगे सुनवाई में तय किया जाएगा।

यह मामला उन जनहित याचिकाओं से जुड़ा है जिनमें पश्चिम बंगाल में मनरेगा भुगतान रुके होने के खिलाफ हस्तक्षेप की मांग की गई थी। राज्य में लगभग तीन वर्षों से मनरेगा मजदूरों को भुगतान नहीं हुआ है, क्योंकि केंद्र ने कथित अनियमितताओं के आरोपों के आधार पर धनराशि रोक दी थी।

इससे पहले, पूर्व मुख्य न्यायाधीश टी. एस. शिवगणनम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने 18 जून को कहा था कि केंद्र सरकार पारदर्शिता और वैधता सुनिश्चित करने के लिए विशेष शर्तें या नियंत्रण लगा सकती है, लेकिन योजना को पूरी तरह रोकना उचित नहीं है। उस समय अदालत ने निर्देश दिया था कि 1 अगस्त से मनरेगा को पुनः लागू किया जाए, जबकि अनियमितताओं की जांच जारी रखी जाए।

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अदालत के ताजा निर्देश के अनुसार, केंद्र को अब यह बताना होगा कि वह राज्य में मनरेगा योजना को किस तरह लागू करेगा और बकाया मजदूरी का भुगतान कब तक करेगा। अदालत ने यह भी कहा कि योजना के लाभ वास्तविक पात्र श्रमिकों तक पहुँचने चाहिए।
मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।

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