बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार (13 अक्टूबर) को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों को पुलिस हिरासत में लेने पर पूरी तरह रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लेने का मामला उसके सामने लाया जाता है, तो वह उस पर उचित कार्रवाई करेगा।
हाईकोर्ट अधिवक्ता सागर देवरे की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में मुंबई में निकाले गए शांतिपूर्ण मार्च के दौरान पुलिस ने सैकड़ों लोगों को बिना किसी कानूनी आधार के हिरासत में लिया।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता मनीष तोमर ने कोर्ट से अंतरिम आदेश जारी करने की मांग की, ताकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों को पुलिस आगे हिरासत में न ले सके।
हालांकि, डिवीजन बेंच ने इस तरह का व्यापक आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वह ऐसा सामान्य आदेश नहीं दे सकता कि किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया जाएगा।
बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता किसी व्यक्ति को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लेने का विशेष मामला सामने लाते हैं, तो कोर्ट उस पर ध्यान देगा और किसी भी गलत कार्रवाई की अनुमति नहीं देगा।
10 और 11 अक्टूबर को सैकड़ों लोगों को हिरासत में लेने का आरोप
याचिका के अनुसार, दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में मुंबई के नागरिकों ने 10 और 11 अक्टूबर को शहर के अलग-अलग हिस्सों में शांतिपूर्ण मार्च निकाले थे।
आरोप है कि इन प्रदर्शनों के दौरान मुंबई पुलिस ने बिना किसी उचित कारण या कानूनी अधिकार के सैकड़ों लोगों को हिरासत में ले लिया।
याचिका में दावा किया गया कि हिरासत में लिए गए लोगों में छात्र और छोटे बच्चों के साथ प्रदर्शन में शामिल महिलाएं भी थीं।
अधिवक्ता सागर देवरे ने अपनी याचिका में कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और पुलिस को ऐसे प्रदर्शनों के दौरान संयम बरतना चाहिए।
याचिका में नागरिकों, वकीलों और अन्य प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने की मांग की गई है। साथ ही पुलिस को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मनमाने और असंवैधानिक तरीके से हिरासत में लेने से रोकने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
राज्य सरकार ने जवाब देने के लिए मांगा समय
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सरकारी वकील मनीष उपाध्याय ने याचिका में लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारियों से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार का अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 19 अक्टूबर को होगी।

