केरल हाईकोर्ट ने राज्य के सामाजिक न्याय निदेशालय को निर्देश दिया है कि वह लिंग पुनर्निर्धारण सर्जरी (एसआरएस) कराने वाले एक ट्रांसजेंडर पुरुष को सर्जरी के बाद के इलाज के लिए शेष 21,000 रुपये की वित्तीय सहायता जल्द जारी करे।
जस्टिस पी वी कुन्हीकृष्णन की एकल पीठ ने इस मामले में दायर रिट याचिका का निपटारा करते हुए सामाजिक कल्याण/सामाजिक न्याय निदेशालय के निदेशक को यह भुगतान करने के लिए दो महीने की समयसीमा तय की है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित अधिकारी फैसले की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तिथि से अधिकतम दो महीने के भीतर यह पात्र राशि याचिकाकर्ता को सौंपें।
दो महीने में भुगतान का निर्देश
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, याचिकाकर्ता ने सर्जरी के बाद की देखभाल और उपचार के लिए राज्य सरकार की कल्याणकारी योजना के तहत कुल 36,000 रुपये की वित्तीय सहायता का दावा किया था। विभाग की ओर से उसे 15,000 रुपये का भुगतान तो कर दिया गया, लेकिन शेष 21,000 रुपये की राशि रोक ली गई। बकाये का भुगतान न होने पर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और बाकी रकम 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दिलाने की गुहार लगाई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने अदालत को अवगत कराया कि राशि जारी करने की प्रशासनिक प्रक्रिया चल रही है और इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की औपचारिक मंजूरी की प्रतीक्षा है। अदालत ने सरकार के इस पक्ष को रिकॉर्ड पर लेते हुए 8 अक्टूबर को याचिका का निपटारा कर दिया और दो महीने के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने को कहा। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई 18 प्रतिशत ब्याज की मांग पर कोई राहत नहीं दी।
व्यक्तिगत मामले तक सीमित रहा फैसला
हाईकोर्ट का यह आदेश केवल याचिकाकर्ता की व्यक्तिगत शिकायत तक सीमित है। इसमें ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए किसी नई नीतिगत रूपरेखा की घोषणा नहीं की गई है और न ही राज्य भर में लंबित ऐसे अन्य आवेदनों के निपटारे के लिए कोई सामान्य समयसीमा तय की गई है।
याचिका में सामाजिक न्याय विभाग, सामाजिक न्याय निदेशालय के निदेशक, केरल राज्य ट्रांसजेंडर बोर्ड और निदेशालय के तहत ट्रांसजेंडर सेल को प्रतिवादी बनाया गया था। इसके साथ संलग्न दस्तावेजों में याचिकाकर्ता का ट्रांसजेंडर पहचान पत्र, सर्जरी से जुड़े मेडिकल प्रमाण पत्र और वित्तीय सहायता से संबंधित 14 नवंबर 2018 व 22 अगस्त 2023 के सरकारी आदेश शामिल थे।
आवेदन प्रक्रिया और समयसीमा
अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने इस सहायता के लिए 1 सितंबर 2025 को राज्य सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया था। इसके बाद 11 सितंबर को संबंधित अधिकारियों के समक्ष एक औपचारिक प्रतिवेदन भी दिया गया था। हालांकि, फैसले में इस बात का ब्योरा दर्ज नहीं है कि प्रशासनिक स्तर पर बाकी राशि के भुगतान में देरी क्यों हुई।

