सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और 10 अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से दाखिल याचिका मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सकी। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों को चुनौती देने वाली इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 14 खामियां पाई हैं, जिन्हें अभी तक दूर नहीं किया गया है।
याचिका में SIR की प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाते हुए इस पूरी प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने और इसकी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
मंगलवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि रजिस्ट्री की ओर से बताई गई खामियां दूर होने के बाद मामलों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने एक पत्रकार की ओर से मामला कोर्ट के सामने रखा था। इस दौरान CJI ने भरोसा दिलाया कि सभी मामलों को सूचीबद्ध किया जाएगा, लेकिन पहले याचिकाओं में मौजूद खामियों को दूर करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रजिस्ट्री ने कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट कॉपी नहीं होने पर भी आपत्ति जताई है। इसके अलावा याचिका के कुछ पन्ने अस्पष्ट हैं, जबकि कुछ पन्ने उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
वोटर लिस्ट से नाम हटाने की स्वतंत्र जांच की मांग
12 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं के बड़े मार्च के बाद दाखिल इस याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान किए गए बदलावों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि एक रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित की जाए। इस समिति में तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों को शामिल किया जाए।
समिति को तय समयसीमा के भीतर SIR के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की जांच करने की जिम्मेदारी दी जाए।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा याचिका दाखिल करने वाले नेताओं में तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, एनसीपी (शरद पवार) की नेता सुप्रिया सुले, शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत, सीपीआई नेता डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी, सीपीआई (एम) के महासचिव एम. ए. बेबी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता ई. टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं।
SIR की मौजूदा प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि मामले में उठाए गए कानूनी सवालों पर अंतिम फैसला होने तक विभिन्न राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया जाए।
विपक्षी नेताओं ने कहा है कि किसी भी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से हटाने से पहले उसे नोटिस और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए। इसके बिना किसी योग्य मतदाता का नाम नहीं हटाया जाना चाहिए।
याचिका में पंजाब और चुनाव वाले अन्य राज्यों के योग्य मतदाताओं को भी कानून के तहत निर्धारित अंतिम तारीख तक अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन करने की अनुमति देने की मांग की गई है।
इसके अलावा चुनाव आयोग को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि SIR के दौरान जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उनकी बूथवार सूची सार्वजनिक की जाए।
इस सूची में प्रत्येक मतदाता का नाम हटाने का कारण और हटाए गए नामों का उम्र तथा लिंग के आधार पर विवरण भी उपलब्ध कराया जाए।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि जिन योग्य मतदाताओं के नाम सूची से हट गए हैं, उन्हें दोबारा शामिल कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
चुनाव आयोग के फैसलों से जुड़ी फाइलें पेश करने की मांग
याचिका में भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को पक्षकार बनाया गया है।
विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि SIR से जुड़े विवादित फैसलों के संबंध में चुनाव आयोग की पूरी फाइलें सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की जाएं।
इनमें बैठकों के एजेंडे, कार्यवाही का विवरण, अधिकारियों की टिप्पणियां और चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज की गई आपत्तियां शामिल हैं।
इसके साथ ही ECINET और ERONET से संबंधित एक्सेस लॉग तथा 24 जून 2025 को देशभर में SIR शुरू करने के फैसले से जुड़ी सभी फाइलें भी पेश करने की मांग की गई है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह जांच करने का अनुरोध किया गया है कि SIR से जुड़े विवादित फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 18 और सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून के अनुरूप लिए गए थे या नहीं।
संविधान का अनुच्छेद 324 मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव कराने की निगरानी, निर्देशन तथा नियंत्रण की जिम्मेदारी चुनाव आयोग को देता है।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि यदि कोई फैसला कानूनी अधिकार के बिना लिया गया पाया जाता है, तो उसे रद्द किया जाए।
इसके अलावा मतदाता सूची तैयार करने या उसमें संशोधन से जुड़े संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की भी मांग की गई है। इसमें जरूरत पड़ने पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई भी शामिल है।
ऑनलाइन फॉर्म-6 को लेकर भी उठाए सवाल
याचिका में मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले ऑनलाइन फॉर्म-6 को लेकर भी निर्देश देने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऑनलाइन फॉर्म-6 का प्रारूप निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 में निर्धारित प्रारूप के अनुरूप होना चाहिए।
जब तक इन नियमों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत बदलाव नहीं किया जाता, तब तक चुनाव आयोग को मौजूदा नियमों के अनुसार ही फॉर्म उपलब्ध कराना चाहिए।
CJI ने पहले राहुल गांधी और खड़गे से मिलने से किया था इनकार
इससे पहले राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीफ जस्टिस जस्टिस सूर्यकांत से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपने का अनुरोध किया था।
ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों के अलावा कई छात्रों की कथित मनमानी गिरफ्तारी, मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और ट्रेनों को रद्द करने जैसे मामलों को उठाया गया था।
हालांकि, CJI ने मुलाकात का अनुरोध स्वीकार नहीं किया था।
राहुल गांधी और खड़गे को भेजे जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया था कि अदालतों में लंबित मामलों पर इस तरह की बैठक करना शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के खिलाफ होगा। यह न्यायिक नैतिकता और स्थापित न्यायिक मर्यादा के भी अनुरूप नहीं होगा।
हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया था कि यदि इन मुद्दों पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल की जाती है, तो उस पर जल्द सुनवाई की जाएगी।
फिलहाल राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की याचिका सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री द्वारा बताई गई खामियों के कारण सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सकी है। इन खामियों को दूर किए जाने के बाद मामला सुनवाई के लिए लगाया जा सकेगा।
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