बियांत सिंह हत्या मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जगतार सिंह हवारा की पंजाब जेल स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई 11 मार्च तक टाली

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री बियांत सिंह की हत्या के दोषी जगतार सिंह हवारा की उस याचिका पर सुनवाई 11 मार्च तक स्थगित कर दी, जिसमें उसने दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में स्थानांतरण की मांग की है।

न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरश और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा समय मांगे जाने पर मामले को स्थगित कर दिया।

हवारा बाबर खालसा से जुड़ा रहा है और 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित सिविल सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए विस्फोट में उसकी भूमिका के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। इस हमले में तत्कालीन पंजाब मुख्यमंत्री बियांत सिंह सहित 17 लोगों की मौत हुई थी।

ट्रायल कोर्ट ने मार्च 2007 में उसे फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2010 में उम्रकैद में बदल दिया और निर्देश दिया कि उसे जीवन भर जेल में रहना होगा। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हवारा और अभियोजन दोनों की अपीलें सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।

27 सितंबर को शीर्ष अदालत ने हवारा की याचिका पर केंद्र सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन, दिल्ली और पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया था।

READ ALSO  Prepare Action Plan for Cases Pending Against MP/MLAs: SC to CJs

याचिका में कहा गया है कि:

  • वह पंजाब में दर्ज मामले में सजा काट रहा है और दिल्ली में उसके खिलाफ कोई लंबित मामला नहीं है।
  • वह फतेहगढ़ साहिब जिले का निवासी है, इसलिए उसे अपने गृह राज्य की जेल में रखा जाना चाहिए।
  • पिछले 19 वर्षों से उसका जेल में आचरण “निर्दोष” रहा है, केवल 22 जनवरी 2004 की कथित जेल ब्रेक की घटना को छोड़कर, जिसके बाद उसे दोबारा गिरफ्तार किया गया था।
  • उसी मामले के एक अन्य दोषी, जो जेल से फरार होने की घटना में शामिल था, को तिहाड़ से चंडीगढ़ जेल स्थानांतरित किया जा चुका है।
  • उसकी बेटी पंजाब में रहती है, पत्नी का निधन हो चुका है और उसकी मां अमेरिका में कोमा में है।
READ ALSO  चेक बाउंस: सीआरपीसी की धारा 2(wa) के तहत शिकायतकर्ता पीड़ित नहीं है: केरल हाईकोर्ट

याचिका में यह भी कहा गया है कि हत्या के बाद उस पर 36 “झूठे मामले” दर्ज किए गए थे, जिनमें से सभी में उसे बरी किया जा चुका है, केवल वर्तमान मामला अपवाद है।

इसके अलावा, यह तर्क दिया गया है कि उसे पहले “हाई-रिस्क कैदी” माना गया था, मात्र इसी आधार पर उसे दिल्ली में रखना उचित नहीं है।

याचिका में यह मुद्दा उठाया गया है कि क्या एक ऐसा आजीवन कारावास भुगत रहा कैदी, जिसने लगभग दो दशकों तक जेल में अच्छा आचरण बनाए रखा हो, अपने गृह राज्य की जेल में स्थानांतरण का दावा कर सकता है, भले ही अपराध की गंभीरता और पूर्व में हुई फरारी की घटना को ध्यान में रखा जाए।

READ ALSO  साकेत बार एसोसिएशन ने 19 जुलाई को हड़ताल की घोषणा की, दिल्ली पुलिस पर वकीलों के खिलाफ पक्षपाती एफआईआर दर्ज कराने का आरोप

मामले की अगली सुनवाई अब 11 मार्च को होगी।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles