बैंक के विलय से चेक अमान्य नहीं होता, कर्नाटक हाईकोर्ट ने धारा 138 की कार्यवाही रद्द करने से किया इनकार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी बैंक का दूसरे बैंक में विलय हो जाने भर से उस बैंक द्वारा जारी चेक अमान्य नहीं हो जाता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विलय के बाद संबंधित बैंक के खाते, संपत्तियां और देनदारियां नई इकाई के पास चली जाती हैं।

जस्टिस सूरज गोविंदराज ने 17 सितंबर के आदेश में भद्रम्मा के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत शुरू की गई कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया।

मामला विजया बैंक के एक चेक के अनादर से जुड़ा था। विजया बैंक का 2019 में बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय हो गया था। चेक पेश करने वाली लीलावती वेंकटेश पुंजाली को बैंक ऑफ बड़ौदा ने बताया था कि विजया बैंक अब अस्तित्व में नहीं है, इसलिए चेक का भुगतान नहीं किया जा सकता।

विलय से बैंक खाता समाप्त नहीं होता

हाईकोर्ट ने यह दलील स्वीकार नहीं की कि विजया बैंक के विलय के कारण उस बैंक के खाते से जुड़ा चेक धारा 138 की कार्यवाही का आधार नहीं बन सकता।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ शुक्रवार को अदालत में उपस्थित नहीं होंगे

कोर्ट ने कहा कि जब किसी बैंक का दूसरे बैंक में विलय होता है तो उसके सभी खाते, संपत्तियां और देनदारियां नई बैंकिंग इकाई को हस्तांतरित हो जाती हैं।

कोर्ट ने माना कि भद्रम्मा का विजया बैंक में मौजूद खाता भी बैंक ऑफ बड़ौदा को स्थानांतरित हो गया था। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि बैंक के विलय के साथ खाता भी समाप्त हो गया और उस खाते से जुड़ा चेक सम्मानित करने की आवश्यकता नहीं रही।

READ ALSO  एनडीपीएस मामलों में अनिवार्य नमूनाकरण प्रक्रियाओं का पालन न करना अभियोजन पक्ष के लिए घातक - इलाहाबाद हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि विजया बैंक के खातों को अपने अधीन लेने के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा की जिम्मेदारी थी कि वह उन खाताधारकों को सेवाएं देता रहे।

चेक के दुरुपयोग का दावा ट्रायल में साबित करना होगा

भद्रम्मा ने अपनी याचिका में यह भी कहा था कि उसने लीलावती को चेक जारी नहीं किया था। उसका दावा था कि उसका एक चेक गुम हो गया था, जिसका बाद में दुरुपयोग किया गया।

हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि यह तथ्य विवादित नहीं था कि भद्रम्मा का विजया बैंक में खाता था और संबंधित चेक उसी खाते से जुड़ा था।

READ ALSO  कलकत्ता हाईकोर्ट ने आईपीएस अधिकारी को महिला पुलिस थाने में यातना के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया

कोर्ट ने कहा कि चेक गुम होने और उसके कथित दुरुपयोग से जुड़ा दावा तथ्यात्मक विवाद है, जिसे ट्रायल के दौरान साबित करना होगा।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने भद्रम्मा के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत चल रही कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles