सिबिल रिकॉर्ड न सुधारने और एनओसी देने में देरी पर एक्सिस बैंक पर जुर्माना, उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला

हरियाणा के एक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने वाहन लोन की पूरी रकम चुकाए जाने के बाद भी ग्राहक का सिबिल (CIBIL) रिकॉर्ड दुरुस्त न करने और नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी न करने पर एक्सिस बैंक पर जुर्माना लगाया है। आयोग ने बैंक के इस रवैए को सेवा में गंभीर कोताही और अनुचित व्यावसायिक तौर-तरीका माना है।

आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह, सदस्य नीरू अग्रवाल और सर्वजीत कौर की पीठ ने बीती 2 जुलाई को यह फैसला सुनाया। आयोग ने एक्सिस बैंक को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता का सिबिल रिकॉर्ड तुरंत सुधारे, लोन क्लोजर सर्टिफिकेट (NOC) जारी करे और लोन मंजूर करते समय लिए गए सभी मूल दस्तावेज ग्राहक को वापस लौटाए। इसके साथ ही बैंक को मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्च के मुआवजे के रूप में शिकायतकर्ता को 20,000 रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है।

कोरोना काल के मोरेटोरियम पर छिड़ा विवाद

यह पूरा मामला 12.90 लाख रुपये के एक वाहन लोन से जुड़ा है, जिसे शिकायतकर्ता ने एक्सिस बैंक से लिया था। शुरुआती समझौते के तहत ग्राहक को 41,625 रुपये की 36 मासिक किस्तें चुकानी थीं। ये किस्तें शिकायतकर्ता के एचडीएफसी (HDFC) बैंक खाते से ऑटो-डेबिट के जरिए काटी जानी तय हुई थीं।

हालांकि, साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान ग्राहक ने जून महीने में पांच महीने के लिए लोन मोरेटोरियम (किस्त भुगतान पर अस्थायी रोक) का विकल्प चुना। इसके चलते उनकी सातवीं से ग्यारहवीं किस्त का भुगतान रुक गया और लोन चुकाने की कुल अवधि 36 महीने से बढ़कर 42 महीने हो गई।

READ ALSO  दिल्ली हाईकोर्ट ने कानून के दुरुपयोग की चिंताओं के बीच POCSO मामले में जमानत दी

एक्सिस बैंक ने इस मामले में अपना बचाव करते हुए आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता ने इस मोरेटोरियम से जुड़े तथ्यों को जानबूझकर छिपाया। बैंक का दावा था कि उसने मोरेटोरियम अवधि के दौरान खाते की देनदारी को संभालने के लिए अतिरिक्त राशि का भुगतान किया था, जिसकी जानकारी शिकायतकर्ता को पहले से थी।

अंतिम किस्त रोकने से बिगड़ा सिबिल स्कोर

दोनों पक्षों के बीच विवाद तब और गहरा गया जब मार्च 2023 में अंतिम किस्त की राशि बढ़कर 58,497 रुपये हो गई और बैंक ने तय तारीख पर इसे ऑटो-डेबिट नहीं किया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उस समय उनके एचडीएफसी बैंक खाते में 1 लाख रुपये का पर्याप्त बैलेंस मौजूद था।

शिकायतकर्ता ने वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले, यानी 17 मार्च 2023 को एक्सिस बैंक को पत्र लिखकर एनओसी मांगी थी। लेकिन बैंक ने न तो अंतिम किस्त काटी और न ही उनके पत्र का कोई जवाब दिया। इसके बाद अगस्त 2023 के अंत में ग्राहक ने मोरेटोरियम की स्थिति स्पष्ट करते हुए दोबारा बैंक को ईमेल किए।

READ ALSO  झारखंड हाई कोर्ट ने चिटफंड कंपनियों द्वारा धन की वापसी सुनिश्चित करने के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाने के लिए 45 दिन की समय सीमा तय की

मामले को जल्द निपटाने के लिए ग्राहक ने आखिरकार बैंक से लोन बंद करने (फोरक्लोजर) का पत्र मांगा और 25,539 रुपये का भुगतान कर खाता बंद करने का अनुरोध किया। यह अंतिम भुगतान 2 सितंबर 2023 को चेक के जरिए किया गया, जिसे बैंक ने 4 सितंबर को क्लियर कर दिया। हालांकि, खाता बंद होने के बाद भी ग्राहक द्वारा सितंबर और अक्टूबर 2023 में भेजे गए कई ईमेल का बैंक ने कोई जवाब नहीं दिया। शिकायतकर्ता ने बैंक को आगाह भी किया था कि इस देरी की वजह से उनका सिबिल स्कोर खराब हो रहा है, जिससे उनके व्यापारिक हितों को नुकसान पहुंच रहा है।

आयोग ने खारिज की बैंक की दलीलें

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने 5 साल के विशिष्ट कार्यकाल के बाद जस्टिस ए एस बोपन्ना को विदाई दी

उपभोक्ता आयोग ने एक्सिस बैंक की दलीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि भले ही कोरोना मोरेटोरियम के कारण लोन की अवधि 42 महीने हो गई थी, लेकिन अंतिम किस्त के समय ग्राहक के खाते में पर्याप्त पैसे मौजूद थे।

चूंकि बैंक ने इस तथ्य को स्वीकार किया है कि लोन की पूरी राशि चुका दी गई है, इसलिए आयोग ने कहा कि बैंक के पास एनओसी रोकने या ग्राहक का सिबिल स्कोर खराब रखने का कोई कानूनी आधार नहीं था। आयोग ने अपने फैसले में कहा कि जब कर्ज की पूरी रकम वसूल ली गई थी, तब यह बैंक की कानूनी जिम्मेदारी थी कि वह सिबिल रिकॉर्ड से ग्राहक का नाम डिफॉल्टर सूची से हटाए। ऐसा न करना सीधे तौर पर सेवा में कमी को दर्शाता है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles