एंटी-इंडिया पोस्ट मामला: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व असम प्रोफेसर को मिली जमानत, कहा—इससे बहाली का आधार न बने

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असम के एक सरकारी कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर को जमानत दे दी, जिन्हें सोशल मीडिया पर एंटी-इंडिया पोस्ट डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत मिलने के बावजूद इसे उनकी नौकरी पर बहाली का आधार नहीं माना जा सकता।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि आरोपी प्रोफेसर मोहम्मद जॉयनुल अबेदीन के खिलाफ दो अन्य मामलों में भी आरोप लगे हैं, जिनमें छात्राओं से छेड़छाड़ और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप शामिल हैं।

पीठ ने यह भी माना कि वह छह महीने से अधिक समय से जेल में हैं और ट्रायल जल्दी पूरा होने की संभावना नहीं दिखती। अदालत ने आदेश में कहा, “सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, उन्हें उचित जमानती बॉन्ड भरने पर रिहा किया जाए। उन्हें हर सुनवाई पर अदालत में उपस्थित होना होगा।”

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साथ ही, पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस राहत को उनकी पुनर्बहाली का आधार न माना जाए। असम सरकार के वकील को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “उनका कॉलेज से निलंबन जैसा है वैसा ही रहेगा।”

12 नवंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड देखने के बाद अबेदीन पर कड़ी टिप्पणी की थी और उन्हें “लड़कियों के लिए खतरा” बताते हुए कहा था कि उन्हें आसानी से जेल से नहीं छोड़ा जा सकता।

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कोर्ट ने कहा था, “आप महिलाओं को सोशल मीडिया पर परेशान करने और अश्लील टिप्पणी करने की आदत में हैं। आप एक विकृत मानसिकता वाले व्यक्ति हैं और कॉलेज की लड़कियों के लिए खतरा हैं। आप प्रोफेसर कहलाने के योग्य नहीं हैं। आपको कॉलेज में प्रवेश नहीं मिलना चाहिए।”

अबेदीन की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि उन्होंने विवादित पोस्ट के लिए माफी मांगी थी और जैसे ही उन्हें एहसास हुआ कि पोस्ट देशहित के खिलाफ है, उसे हटा दिया गया था।

16 मई को उन्हें गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में हैं। उनके वकील ने यह भी कहा कि गोसाईगांव कोर्ट में न्यायिक अधिकारी न होने के कारण ट्रायल अनिश्चितकाल के लिए लंबित है। इस वजह से सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले गौहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से रिक्त पद भरने या फिर मामला कोकराझार सत्र न्यायालय में ट्रांसफर करने पर विचार करने को कहा था।

अबेदीन, जो गोसाईगांव के निवासी हैं, पर मई में एंटी-इंडिया पोस्ट करने का आरोप लगा था, जिसके आधार पर पहले उन्हें हिरासत में लिया गया और फिर गिरफ्तार किया गया। उन्होंने गौहाटी हाई कोर्ट द्वारा जमानत से इनकार किए जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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